एशिया कप ट्रॉफी रखने के नियम: विजेता के अलावा कोई और नहीं रख सकता, जानें क्या है इसके पीछे का कारण

नई दिल्ली, भारत ने रविवार रात को पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर नौवीं बार एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। टूर्नामेंट के 41 साल के इतिहास में पहली बार दोनों टीमों की फाइनल में भिड़ंत हुई थी। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भी चैंपियन टीम इंडिया को बिना ट्रॉफी के जश्न मनाना पड़ा। वजह ये रही कि एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के भी चीफ हैं, ने ट्रॉफी ही ‘चुरा’ ली। भारतीय टीम ने जब उनके हाथ से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया तब वह ट्रॉफी और मेडल अपने साथ होटल लेकर चले गए। क्या विजेता के बजाय कोई और ट्ऱॉफी रख सकता है? क्या कोई टीम ट्रॉफी लेने से इनकार कर सकती है? आखिर नियम क्या है?

रविवार देर रात दुबई के इंटरनेशनल स्टेडियम में एशिया कप फाइनल में भारत की खिताबी जीत के बाद जो कुछ हुआ वो अभूतपूर्व था। एसीसी अध्यक्ष और पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी ने भारतीय टीम की ट्रॉफी ही ‘चुरा’ ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इससे पहले ये कभी नहीं हुआ था कि फाइनल मैच के बाद चैंपियन टीम को ट्रॉफी देने के बजाय कोई आयोजक, किसी बोर्ड के अध्यक्ष ने ट्रॉफी अपने पास रख ली हो। क्रिकेट के नियम बनाने वालों ने तो कभी कल्पना तक नहीं की होगी कि एक दिन कभी ऐसा भी हो सकता है। लेकिन मोहसिन नकवी ने गिरने की सारी हदें पार कर दी।

ट्रॉफी को लेकर क्या कहता है ACC का नियम?

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) दोनों के ही ट्रॉफी की कस्टडी को लेकर नियम स्पष्ट है। नियम के मुताबिक फाइनल जीतने वाली टीम को मैच के ठीक बाद आधिकारिक समारोह में ट्रॉफी दी जाती है।

अगर मौसम या किसी अन्य वजहों से फाइनल मैच पूरा नहीं हो पाता है तो एसीसी के नियमों के मुताबिक दोनों टीमें ट्रॉफी शेयर करेंगी और दोनों को ही चैंपियन माना जाएगा।

क्या विजेता टीम को देने के बजाय कोई और रख सकता है ट्रॉफी?

नहीं। नियमों में यह स्पष्ट है कि फाइनल मैच के बाद ट्रॉफी को प्रजेंटर या आयोजक अपने पास नहीं रख सकते। उसे विजेता टीम को मैच के बाद आधिकारिक समारोह में सौंपना होता है। ये रूल और रेग्युलेशन आम तौर पर चली आ रही प्रथाओं के अनुरूप होते हैं जिन्हें खेल भावना और उसकी शुचिता को बनाए रखने के लिए सख्ती से लागू किया जाता है।

चैंपियन टीम के पास कब तक रहती है ट्रॉफी?

नियमों के अनुसार चैंपियन टीम एक तय समय तय ट्रॉफी अपने पास रखती है। उस पीरियड के बाद उसे ट्रॉफी की रेप्लिका दी जा सकती है जिसे विजेता टीम हमेशा के लिए अपने पास रख सकती है।

अगर कोई टीम किसी के हाथ से ट्रॉफी लेने से इनकार करे तब?

अगर कोई टीम किसी व्यक्ति विशेष के हाथ से ट्रॉफी लेने से इनकार करे तो इसे लेकर नियम स्पष्ट नहीं हैं। भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी के हाथ से एशिया कप की ट्रॉफी लेने से इनकार किया। इसकी वजह ये रही कि नकवी पाकिस्तान सरकार में मंत्री भी हैं और वह भारत-विरोधी जहरीले बयानों के लिए कुख्यात हैं। पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया। यहां ये फर्क समझना जरूरी है कि भारत ने ट्रॉफी लेने से इनकार नहीं किया, बस नकवी के हाथ से उसे ट्रॉफी नहीं चाहिए थी। उनकी जगह किसी अन्य के हाथ से ट्रॉफी लेने के लिए भारतीय टीम तैयार थी।

मोहसिन नकवी अपने बचाव में आईसीसी के सामने ये तर्क दे सकते हैं कि वह तो ट्रॉफी देने के लिए तैयार थे, भारतीय टीम ने ही ट्रॉफी नहीं ली। लेकिन उनके पास इस बात का कोई भी वाजिब जवाब नहीं होगा कि उन्होंने नियमों और प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाकर ट्रॉफी अपने पास क्यों रख ली? ट्रॉफी और मेडल क्यों ‘चुरा’ लिए?

अब आगे क्या?

जाहिर है मोहसिन नकवी ने ‘ट्रॉफी चोरी’ का जो कृत्य किया है, वो साफ तौर पर नियमों के खिलाफ है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड यानी बीसीसीआई ने इसके खिलाफ आईसीसी में सख्त विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। नवंबर के पहले हफ्ते में दुबई में आईसीसी की बैठक होगी, उसमें बीसीसीआई इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएगा।

बीसीसीआई ने मोहसिन नकवी के द्वारा’ट्रॉफी चोरी’ पर बहुत ही सख्त प्रतिक्रिया दी है। बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया ने मुंबई में बोर्ड हेडक्वार्टर पर पत्रकारों से बातचीत में कहा है, ‘यह अप्रत्याशित है, बहुत बचकाना है। हम नवंबर के हपहले हफ्ते में दुबई में होने वाली आईसीसी की बैठक में बहुत कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे। हमने एसीसी अध्यक्ष और पाकिस्तान के प्रमुख नेता से ट्रॉफी लेने से इनकार किया लेकिन इससे उस व्यक्ति (मोहसिन नकवी) को ट्रॉफी और पदक अपने साथ अपने होटल ले जाने की अनुमति नहीं मिल जाती।’

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