एक एकड़ में सवा लाख रुपये का मुनाफा देने वाली पाम ऑयल खेती: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नई राह

पाम ऑयल खेती

पाम ऑयल की खेती से किसानों को आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम और बढ़ाया

महासमुंद: पाम ऑयल की खेती छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का एक नया रास्ता बनकर उभरी है। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पाम योजना के तहत, जो खासतौर पर पाम ऑयल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है, किसानों को अब आयात पर निर्भरता कम करने और आय में वृद्धि के नए अवसर मिल रहे हैं। इस योजना के तहत, महासमुंद जिले में लगभग 400 किसान 450 हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती कर रहे हैं, और अब वे लाखों रुपये की वार्षिक आय कमा रहे हैं।

मुकेश चंद्राकर का पाम खेती से सफर

सरायपाली भलेसर गांव के किसान मुकेश चंद्राकर एक बेहतरीन उदाहरण हैं, जिन्होंने अपनी 33 एकड़ बंजर भूमि पर 2016 में पाम ऑयल की खेती शुरू की थी। वे सरकार की योजना से प्रेरित होकर अपनी ज़मीन पर लगभग 1900 पौधे लगाए। इस योजना के तहत उन्हें पौध प्रदाय, फेंसिंग, रखरखाव, और ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर प्राप्त हुईं। इसके बाद, कुछ वर्षों में उनका खेत फलने-फूलने लगा। आज, प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है।

इंटरक्रॉपिंग से अतिरिक्त लाभ

पाम ऑयल की खेती के साथ-साथ, श्री चंद्राकर ने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में केले की खेती भी की। इससे उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ हुआ। वर्तमान में, वे कोको की खेती भी कर रहे हैं और निजी कंपनियों को उत्पाद विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें और अधिक आय प्राप्त हो रही है।

कम पानी, कम खाद, और अधिक लाभ

मुकेश चंद्राकर बताते हैं कि पाम ऑयल की खेती में कम पानी, कम खाद, और कम कीटनाशक का उपयोग होता है, फिर भी उत्पादन अधिक होता है और बेहतर लाभ मिलता है। इस कारण से उन्होंने अन्य किसानों को भी पाम की खेती अपनाने की सलाह दी है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी प्रदान किया है, जो गांव के स्थानीय मजदूरों के लिए एक बड़ी राहत है।

सरकार का समर्थन और पहल

सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग पायल साव ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य भारत को पाम ऑयल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन, और विपणन सुविधाएं दी जा रही हैं ताकि उन्हें उत्पादन और विक्रय में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, पाम ऑयल खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी किया गया है, जिसमें कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पाम की खेती करें।

पाम ऑयल की खेती का व्यापक उपयोग

पाम ऑयल का उपयोग खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन और औषधि निर्माण में किया जाता है। ऐसे में, इस फसल का व्यावसायिक महत्व और बढ़ जाता है। महासमुंद जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी, और अधिक आय देने वाली पाम ऑयल खेती किसानों की आर्थिक स्थिति में एक सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। इसके अलावा, यह फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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