एक देश, एक चुनाव के बाद क्या ‘एक नेता’ हो जाएगा? चुनाव एक्सपर्ट्स की राय इसपर क्या, सामने रखे आंकड़े

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दूसरे दिन एक देश, एक चुनाव के विषय पर भी चर्चा हुई. वन नेशन, वन इलेक्शन से संबंधित सेशन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रवक्ता गौरव भाटिया, कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, बीजेपी से ही जुड़े संवैधानिक मामलों के जानकार हितेश जैन के साथ ही एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के संस्थापक जगदीप एस छोकर और राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने शिरकत की.

एक देश, एक चुनाव क्या एक नेता हो जाएगा? 2029 में अगर एक देश एक चुनाव हुए तो तस्वीर कैसी हो सकती है? इस सवाल पर राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि 2024 में भी आम चुनाव के साथ चार राज्यों के चुनाव हुए. आप नतीजे देख लीजिए. उन्होंने कहा कि ओडिशा और अरुणाचल में बीजेपी की सरकार बनी. सिक्किम में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए में शामिल सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा और आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी. अमिताभ तिवारी ने कहा कि लोकसभा चुनाव में अच्छा करने वाली पार्टी या गठबंधन ही राज्य में भी बेहतर किए हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि आजादी के बाद जब देश में एक साथ चुनाव होता था, तब भी नतीजे ऐसे ही आते थे. तब केरल जैसे राज्य को हटा दें तो ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस ही जीतती थी जो लोकसभा में भी बेहतर कर रही होती थी. अमिताभ तिवारी ने कहा कि एक देश, एक चुनाव में एक ईवीएम की जगह दो ईवीएम हो जाएंगे. एक बटन की जगह दो बटन दबाने होंगे और ज्यादातर मतदाता एक पार्टी के पक्ष में मन बना चुके होते हैं. वोटर साइकोलॉजी यही कहती है कि वो सेम बटन दबाते हैं. उन्होंने कहा कि हालिया चुनावों के साथ ही पहले हुए एक देश, एक चुनाव में भी यही देखने को मिला है.

वहीं, एडीआर के संस्थापक जगदीप छोकर ने कहा कि हम इतिहास की बात कर रहे हैं. पांच साल पहले के इतिहास की बात कर लें. 2014 में रुलिंग पार्टी ने एक देश एक चुनाव का वादा किया था. उन्होंने कहा कि हमने 2018 तक इस पर बहुत रिसोर्सेज खर्च किए और फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी. जगदीप छोकर ने कहा कि साल 2024 के चुनाव से पहले महिला आरक्षण बिल लेकर आए लेकिन उसे कब लागू किया जाएगा, ये नहीं पता है. उसी तरह एक देश एक चुनाव के लागू होने का भी पता नहीं है.

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक देश, एक चुनाव को हॉट एयर बैलून बताते हुए कहा कि जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इसके लिए संसद में दो तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी. लोकसभा में यह बिल पास कराने के लिए 361 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी और सरकार के पास 293 का समर्थन है. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकार ने जिस तरह से वक्फ बिल जैसे बिल्स पर यू-टर्न लिया, इस पर भी ऐसा ही होगा. यह लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर प्रहार है. देश में केवल लोकसभा के नहीं, विधानसभा और निकायों के चुनाव भी होते हैं, इसका भी ध्यान रखना होगा.

उन्होंने खर्च बचने के तर्क को लेकर सवाल पर कहा कि एक देश एक चुनाव के लिए भी ईवीएम से लेकर वीवीपैट तक, बड़ी संख्या में चाहिए होंगी. क्या इनके निर्माण पर खर्च नहीं आएगा. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि नोटबंदी के समय भी इसी तरह के तर्क दिए गए थे कि टेरर फंडिंग बंद हो जाएगी, ये बंद हो जाएगा, वो बंद हो जाएगा. सब वैसे ही है. उन्होंने कहा कि हम एक देश, एक भाषा, एक कल्चर, एक रंग नहीं हैं. उन्होंने आजादी के बाद एक देश, एक चुनाव को लेकर कहा कि हां, तब हुए थे लेकिन इसके बाद अब रीजनल पार्टियां मजबूती से उभरी हैं.

सुप्रिया श्रीनेत ने इसे लेकर बनाई गई कमेटी में गुलाम नबी आजाद को रखने पर भी सवाल उठाए जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. उन्होंने कहा कि आप राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को कमेटी में नहीं रखते. कांग्रेस प्रवक्ता ने ये भी कहा कि जम्मू कश्मीर और हरियाणा के साथ महाराष्ट्र के चुनाव तो करा नहीं पाते हैं, बात करते हैं एक देश एक चुनाव की. उन्होंने कहा कि खर्च बचाने की बात हो रही है. एक देश एक चुनाव के लिए ईवीएम से लेकर वीवीपैट तक, सबकी जरूरत भारी मात्रा में पड़ेगी. क्या इसपर खर्च नहीं आएगा.

बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने फेडरल स्ट्रक्चर को लेकर सवाल पर कहा कि कांग्रेस की सरकारों में राज्यों की सरकार बर्खास्त करना, जम्मू कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल 6 साल करना, इंदिरा गांधी का लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाना फेडरल स्ट्रक्चर पर हमला था. उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद जी की अगुवाई वाली कमेटी ने ये सिफारिश की है, सुभाष कश्यप ने भी इसे जरूरी बताया है. गौरव भाटिया ने खड़गे के बयान का जिक्र करते हुए विपक्ष को संविधान का आर्टिकल 368 पढ़ने की नसीहत दी. गौरव भाटिया ने कहा कि विपक्ष को आर्टिकल 370, राम मंदिर भी जुमला लगता है. ये नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो लगातार तीन चुनाव जीतकर आए हैं. एक देश एक चुनाव भी होगा.

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