धान खरीदी घोटाला: 70 लाख की हेराफेरी में प्रभारी गिरफ्तार, प्रशासन की नींद उड़ी!

धान खरीदी घोटाला


कबीरधाम में धान खरीदी घोटाला: 70 लाख रुपये की हेराफेरी में प्रभारी गिरफ्तार

कबीरधाम जिले में धान खरीदी के दौरान एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस घोटाले में 70 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी की गई है, और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मामला जिले के पेण्ड्रीकला स्थित धान उपार्जन केंद्र का है, जहां प्रभारी विवेक चंद्राकर ने सरकारी धान के रिकॉर्ड में हेराफेरी की थी। इस घोटाले ने न केवल शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

घोटाले की पूरी कहानी:

  1. शिकायत और जांच की शुरुआत:
    • शिकायत राजेन्द्र कुमार डाहिरे, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के शाखा कुण्डा से दर्ज कराई गई थी।
    • इसके बाद 2025-26 के दौरान धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया गया।
    • जांच में पाया गया कि 12 जनवरी 2026 तक 23,319.20 क्विंटल धान खरीदी गई थी, लेकिन केंद्र में धान की वास्तविक मात्रा इससे काफी कम थी।
  2. कमी का खुलासा:
    • जांच में सामने आया कि 3,880 क्विंटल धान का उठाव हो चुका था, जबकि 19,439.20 क्विंटल धान केंद्र में होना चाहिए था।
    • लेकिन वास्तविकता में 2,272 क्विंटल धान की कमी पाई गई, जिसकी शासकीय मूल्य 70 लाख 43 हजार 200 रुपये थी।
  3. रिकॉर्ड में हेराफेरी:
    • आरोपी विवेक चंद्राकर ने तौल पत्रक और रजिस्टर में कूट रचना (फर्जीवाड़ा) कर धान का गबन किया।
    • इस घोटाले के तहत सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई, जिससे बड़ी मात्रा में धान का गबन किया गया।

आरोपी की गिरफ्तारी और कार्रवाई:

  • पुलिस ने जांच के बाद आरोपी विवेक चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया।
  • आरोपी ने पूछताछ के दौरान रिकॉर्ड में हेराफेरी करने और धान गबन करने की बात स्वीकार कर ली।
  • इसके बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मामले की जांच के अन्य पहलू:

  • पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
  • यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस घोटाले में कोई और कर्मचारी या अधिकारी शामिल था।
  • इस जांच के तहत पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा रही है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

टीम का सराहनीय योगदान:

  • इस कार्रवाई में उप निरीक्षक जयराम यादव, प्रधान आरक्षक मुकेश राजूपत, संजय मरावी, जयंती पटेल और जेठूराम की अहम भूमिका रही।
  • पुलिस अधीक्षक ने इन अधिकारियों की कार्रवाई की सराहना की है।

सहकारी समितियों और धान खरीदी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल:

  • इस घटना ने जिले में सहकारी समितियों और धान खरीदी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
  • प्रशासन अब इस प्रकार की गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

समाप्ति विचार:
यह धान खरीदी घोटाला न केवल एक सरकारी लापरवाही की तस्वीर पेश करता है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि अगर प्रशासन सही तरीके से निगरानी नहीं रखेगा, तो ऐसे घोटाले आम हो सकते हैं। इस घटना से सीखते हुए सरकार और प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों से बचा जा सके।

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