छत्तीसगढ़ धान खरीदी
रायपुर से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Chhattisgarh में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर गड़बड़ी उजागर हुई है। वर्ष 2024-25 में खरीदे गए धान में कुल 1,61,725.5 मीट्रिक टन की कमी दर्ज की गई है। सरकारी दर से अनुमान लगाया जाए तो यह नुकसान 500 करोड़ रुपए से अधिक बैठता है।
यह मामला अब प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है।
कितनी हुई कमी?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
- वर्ष 2024-25 में 87 संग्रहण केंद्रों में
- कुल 37,76,737.8 मीट्रिक टन धान जमा हुआ
- उठाव प्रक्रिया (डीओ और बीओ) के बाद
- रिकॉर्ड में 1.61 लाख मीट्रिक टन धान की कमी दर्ज
भौतिक सत्यापन के दौरान कई जगहों पर:
- सड़े हुए बोरे
- खराब अनाज
- खाली स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक भंडारण में अंतर
जैसी अनियमितताएं सामने आईं।
जिलों की स्थिति: बस्तर सबसे आगे, बीजापुर सबसे पीछे
प्राप्त जानकारी के अनुसार:
- Bastar जिले में सबसे अधिक कमी दर्ज
- Bijapur जिले में सबसे कम अंतर
अन्य जिलों में भी कमी सामने आने से यह स्पष्ट है कि समस्या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यव्यापी है।
अधिकारियों के अलग-अलग बयान
मामले में विभिन्न जिलों के अधिकारियों के बयान भी अलग-अलग हैं:
- Kabirdham (कवर्धा) के विपणन अधिकारी ने चूहों द्वारा धान नष्ट होने की बात कही
- कुछ अधिकारियों ने समय पर उठाव न होने को जिम्मेदार बताया
- कई जगह खुले में भंडारण और मौसम के प्रभाव को कारण बताया गया
- सूखने और सड़ने की दलील भी दी गई
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में नुकसान केवल प्राकृतिक कारणों से संभव नहीं है।
संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- भंडारण व्यवस्था की गंभीर खामियां
- निगरानी तंत्र की कमजोरी
- समय पर परिवहन नहीं होना
- खुले में लंबे समय तक स्टॉक रखना
- रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर
ये सभी कारक मिलकर बड़े पैमाने पर नुकसान की वजह बन सकते हैं।
सरकार के दावों पर सवाल
राज्य सरकार हर साल रिकॉर्ड स्तर पर धान खरीदी का दावा करती रही है।
लेकिन जब भंडारण और रख-रखाव में इतनी बड़ी कमी सामने आती है, तो कई सवाल उठते हैं:
- क्या संग्रहण केंद्रों की नियमित जांच होती है?
- क्या डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम प्रभावी है?
- जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया क्या है?
यह मामला न केवल वित्तीय नुकसान का है, बल्कि किसानों के भरोसे से भी जुड़ा हुआ है।
आगे क्या होगा?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि:
- क्या उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जाएंगे?
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
- भंडारण व्यवस्था में सुधार के ठोस कदम उठाए जाएंगे?
500 करोड़ से अधिक का अनुमानित नुकसान प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।