पार्टी लाइन जरूरी लेकिन जनता का मुद्दा उठाना हमारा कर्तव्य’, दिल्ली से लौटने के बाद बोले विक्रमादित्य सिंह

हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए नेम प्लेट अनिवार्य करने के फैसले ने विवाद शुरू कर दिया है. इस मुद्दे पर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री विक्रमादित्य सिंह का बयान चर्चाओं में है. हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री सिंह ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और इसे उन नीतियों से जोड़ा गया है जिन्हें साम्प्रदायिक आधार पर अन्य राज्यों में लागू किया गया था.

विक्रमादित्य सिंह ने कहा, “हिमाचल के हितों के लिए काम करना हमारा दायित्व और जिम्मेदारी है. पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह के मूल्यों पर काम करेंगे. कांग्रेस कार्यकर्ता हूं और प्रदेश में पार्टी के सिद्धांतों के अनुसार हमेशा काम करेंगे.”

विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि स्ट्रीट वेंडर प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड स्ट्रीट वेंडर एक्ट एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मसलों के संदर्भ में 2010 और 2012 में लागू करने का आदेश दिया था. 2023 में हिमाचल हाईकोर्ट ने इस संबंध में मामला संज्ञान में लिया था और विधानसभा ने इस पर एक कमेटी भी बनाई थी.

विक्रमादित्य सिंह ने कहा, “मेरे बयान को कानून के संदर्भ में दिया गया था, जिसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. मेरे दिल्ली यात्रा का कार्यक्रम पहले से तय था और वहां मैं रेलवे बोर्ड के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने और अर्बन डेवलपमेंट मंत्रालय के कार्यक्रम में भाग लेने गया था.” उन्होंने कहा, “पार्टी लाइन के साथ रहना मेरी प्राथमिकता है, मगर प्रदेश की जनता के मसले उठाना भी हमारा कर्तव्य है.”

विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश के आंतरिक सुरक्षा को मजबूत रखना अनिवार्य है और इसके तहत स्ट्रीट वेंडर्स के रजिस्ट्रेशन और रेगुलराइजेशन को अहम समझा गया है. उन्होंने कहा, “प्रदेश में कोई भी व्यक्ति हिमाचल या बाहरी व्यक्ति काम कर सकता है, लेकिन उन्होंने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात पर जोर दिया है.

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