महाराष्ट्र के ठाणे जिला स्थित बदलापुर के एक स्कूल में दो बच्चियों के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा फूट रहा है

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान स्कूलों में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए. साथ ही मुंबई प्रशासन ने स्कूलों की व्यवस्था को लेकर कई बदलाव क‍िए हैं. 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में पूछा था कि अगर स्कूल सुरक्षित जगह नहीं हैं… तो ‘शिक्षा के अधिकार’ के बारे में बात करने का क्या मतलब है? कोर्ट ने कई मामलों में पुलिस और राज्य को फटकार भी लगाई, जिसमें केस दर्ज न करना भी शामिल है. कोर्ट में आगे कहा गया कि यह एक परेशान करने वाली बात है कि कैसे कोलकाता के आरजी कर अस्पताल ने इस महीने एक डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में लड़कियों की शिकायतों के बावजूद स्कूल के खिलाफ केस दर्ज करने में देरी की गई.

मंत्री लोढ़ा ने निर्देश दिया कि शौचालयों को छोड़कर पूरे स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और बीट मार्शल या गश्त करने वाली पुलिस टीमों द्वारा निगरानी की जाए. उन्होंने यह भी अनिवार्य किया कि लड़कियों के शौचालयों के बाहर देखरेख के लिए एक महिला कर्मचारी को नियुक्त किया जाए और इस बात पर ज़ोर दिया कि महिला सफाई कर्मचारियों को कम उम्र की लड़कियों और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शौचालयों की सफ़ाई करनी चाहिए. इसके अलावा यह भी निर्देश दिया कि बसों, टैक्सियों और वैन जैसे छात्र परिवहन साधनों में एक महिला कर्मचारी मौजूद होनी चाहिए, तथा स्कूलों में सफाई कर्मचारियों पर भी पुलिस की नजर होनी चाहिए. 

मंत्री लोढ़ा ने स्कूलों को लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग देने के लिए स्थानीय गैर सरकारी संगठनों के साथ सहयोग करने की सलाह दी है. इमरजेंसी में छात्रों को 1098 हेल्पलाइन पर घटनाओं की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. स्कूलों में इस बारे में पोस्टर कैंपस में पोस्टर लगाने चाहिए. इसके अलावा महिलाओं को हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी जानकारी देनी चाहिए. स्कूल में लड़कियों को पोस्टर लगाकर हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल करना चाहिए.

मंत्री प्रभात लोढ़ा ने अपने पत्र में कहा, “महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध सरकार, प्रशासन और हमारे समाज के लिए चिंता का विषय हैं. बदलापुर में हुई घटना ने रोकथाम के उपायों के लिए सार्वजनिक सुझाव दिए हैं. महिला सुरक्षा के प्रति लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं. इसे ध्यान में रखते हुए, मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में किंडरगार्टन से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक सभी शैक्षणिक संस्थानों को सख्त निर्देश दिए जाने चाहिए. स्कूल, कॉलेज और विभिन्न संस्थानों को भी अपने द्वारा नियुक्त कर्मचारियों का अच्छी तरह से सत्यापन करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई अप्रिय घटना न हो, और सभी को सावधानी बरतनी चाहिए.”

निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल कानून में संशोधन किया गया था. इसके बाद अगर कोई 16 साल और 18 साल से कम उम्र का कोई किशोर जघन्य अपराध करता है तो उसके साथ वयस्क की तरह ही बर्ताव किया जाएगा. ये संशोधन इसलिए हुआ था, क्योंकि निर्भया के छह दोषियों में से एक नाबालिग था और तीन साल में ही रिहा हो गया था.

इसके अलावा, रेप के मामलों में मौत की सजा का भी प्रावधान भी किया गया था. इसके बाद अगर रेप के बाद पीड़िता की मौत हो जाती है या फिर वो कोमा जैसी हालात में पहुंच जाती है, तो दोषी को फांसी की सजा भी दी जा सकती है.

हालांकि, इन सबके बावजूद सुधार नहीं हुआ है. आंकड़े बताते हैं कि 2012 से पहले हर साल रेप के औसतन 25 हजार मामले दर्ज किए जाते थे. लेकिन इसके बाद ये आंकड़ा 30 हजार के ऊपर पहुंच गया. 2013 में ही 33 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए थे. 2016 में तो आंकड़ा 39 हजार के करीब पहुंच गया था.

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