तेल और गैस संकट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोकसभा में तेल और गैस संकट पर विस्तृत भाषण दिया, खासकर उस स्थिति में जब ईरान में जारी युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। आइए जानें कि पीएम मोदी ने क्या कहा और भारत को इस संकट से कैसे उबरने की योजना बनाई है।
1. ईरान युद्ध और वैश्विक संकट
- युद्ध का प्रभाव: ईरान के आसपास के क्षेत्र में चल रहे युद्ध ने तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है।
- भारत की भूमिका: भारत, जो पहले से ही इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस आयात करता है, अब इस संकट से निपटने के लिए नई रणनीतियाँ बना रहा है।
- आवश्यक कदम: पीएम मोदी ने कहा कि भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। सरकार सभी प्रभावित देशों के साथ बातचीत कर रही है और भारतीयों को सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं।
2. भारत की तैयारी: घरेलू आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा
- भंडारण का महत्व: भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का तेल रिजर्व है, जिसे 65 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा रहा है।
- एनर्जी डाइवर्सिफिकेशन: पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने अपने ऊर्जा आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक diversifie किया है, ताकि संकट के समय आपूर्ति बनी रहे।
- एथेनॉल ब्लेंडिंग: पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से हर साल करीब 4 करोड़ बैरल तेल कम इंपोर्ट हो रहा है, जो संकट के समय एक अहम बचत साबित हो रहा है।
3. कृषि और बिजली आपूर्ति का ध्यान
- कृषि पर असर: पीएम मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार हरसंभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण दिया, जब सप्लाई बाधित होने के बावजूद किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया था।
- बिजली आपूर्ति: गर्मियों में बढ़ती बिजली की डिमांड को ध्यान में रखते हुए, देश के पावर प्लांट्स में कोयले की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
4. आगे की चुनौती: वैश्विक कूटनीति
- भारत की शांति नीति: पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है। युद्ध के इस संकट में, भारत कूटनीति के माध्यम से शांति की दिशा में प्रयास कर रहा है और सभी पक्षों से जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद करता है।
5. आगे की दिशा
- सतर्कता और निगरानी: पीएम मोदी ने कहा कि संकट के समय कुछ लोग इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। ऐसे में सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।
- लंबे समय तक असर: यह संकट केवल एक तात्कालिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके लंबे समय तक असर पड़ने की संभावना है। इसलिए, पूरी दुनिया को इस संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है।