सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह कहते हुए दिखाया गया है कि ‘शिक्षित देशों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है, जबकि भारत जैसे अनपढ़ देश ईवीएम का उपयोग करते हैं।’ इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि यह बयान पीएम मोदी ने 2014 से पहले दिया था और बैलेट पेपर को ईवीएम से बेहतर बताया था। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
वायरल वीडियो में पीएम मोदी की एक क्लिप को यह साबित करने के लिए इस्तेमाल किया गया है कि उन्होंने कभी ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर का समर्थन किया था। वीडियो में वह यह कहते सुने जा सकते हैं कि ‘शिक्षित देश अभी भी बैलेट पेपर का उपयोग करते हैं।’ इस बयान को तोड़-मरोड़ कर यह दावा किया गया कि पीएम मोदी ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पक्षधर थे।
फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट BOOM ने इस वीडियो की सच्चाई का खुलासा किया। उन्होंने पाया कि यह वीडियो पीएम मोदी के 3 दिसंबर 2016 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दिए गए भाषण से लिया गया है। यह भाषण उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद दिया गया था, न कि 2014 से पहले।
वायरल क्लिप को पीएम मोदी के भाषण के संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया है। असल में, अपने भाषण में पीएम मोदी ने भारत में ईवीएम के उपयोग की प्रशंसा की थी। उन्होंने उन आलोचकों को निशाने पर लिया जो भारत को अनपढ़ और तकनीकी रूप से पिछड़ा मानते हैं। पीएम मोदी ने कहा, “हमारा देश गरीब है, लोग अनपढ़ हैं। लेकिन जब चुनाव होते हैं, हम ईवीएम का उपयोग करते हैं। वहीं, अमेरिका जैसे शिक्षित देश अभी भी बैलेट पेपर पर भरोसा करते हैं।”
वायरल वीडियो का उद्देश्य जनता को भ्रमित करना और ईवीएम पर सवाल खड़े करना प्रतीत होता है। वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि मोदी ने बैलेट पेपर को प्राथमिकता दी थी, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से ईवीएम को तकनीकी उन्नति का उदाहरण बताया और इसे भारतीय लोकतंत्र की सफलता का प्रतीक कहा। यह स्पष्ट है कि वायरल वीडियो एक झूठी जानकारी फैलाने का प्रयास है।