UNGA सत्र से PM मोदी ने बनाई दूरी, अब विदेश मंत्री उनकी जगह संयुक्त राष्ट्र में करेंगे शिरकत

डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार न्यूयॉर्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में न जाने का निर्णय लिया है। उनकी अनुपस्थिति में विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करेंगे। गौरतलब है कि 24 जुलाई को यह जानकारी सामने आई थी कि भारत ने 26 सितंबर को पीएम मोदी के संबोधन के लिए समय तय किया था। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री का नाम सूची में दर्ज होने के बावजूद अंतिम क्षणों में विदेश मंत्री ने उनका स्थान लिया हो।

पीएम मोदी की यात्रा रद्द होने की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी। इसमें बदलाव तभी मुमकिन था जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत में अचानक कोई बड़ी सफलता मिलती। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसी संभावना बेहद कम नज़र आ रही थी।
9 सितंबर से शुरू हो रहा है सत्र

UNGA का 80वां सत्र 9 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। इसकी आम बहस 23 से 29 सितंबर तक आयोजित होगी। परंपरा के अनुसार सबसे पहले ब्राज़ील अपना संबोधन देगा और उसके बाद अमेरिका की बारी आएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 23 सितंबर को UNGA मंच से विश्व नेताओं को संबोधित करेंगे। यह व्हाइट हाउस में उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान महासभा में दिया गया उनका पहला भाषण होगा।
27 सितंबर को संबोधित करेंगे विदेश मंत्री

शुक्रवार को जारी की गई संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की उच्च-स्तरीय आम बहस की संशोधित सूची के मुताबिक, भारत की ओर से प्रतिनिधित्व ‘मंत्री’ स्तर पर होगा। अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर 27 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे। जुलाई में जारी अस्थायी सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम 26 सितंबर को भाषण देने वालों में शामिल था, लेकिन इसमें बदलाव कर दिया गया है। वहीं 26 सितंबर को इज़राइल, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के राष्ट्रप्रमुख आम बहस में हिस्सा लेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों के चलते भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आ गई है। रूस से सस्ता तेल खरीदने को लेकर ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% का अतिरिक्त शुल्क थोप दिया है। इससे पहले भी इतने ही प्रतिशत का टैक्स लगाया गया था। अब स्थिति यह है कि अमेरिकी बाजार में सामान भेजने पर भारत को कुल 50% टैक्स अदा करना पड़ रहा है। अब इसका सीधा असर दोनों देशों के रिश्तों पर साफ झलक रहा है।

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