दशकों के इंतज़ार को खत्म करने और लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखी है। अपने हालिया लेख में उन्होंने तर्क दिया कि राजनीति में महिलाओं की कम भागीदारी उस असंतुलन को दर्शाती है जिसे अब और टालना उचित नहीं है। पीएम ने इसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, राष्ट्र निर्माण के एक बड़े मिशन के रूप में पेश किया है।
पीएम मोदी(PM Modi) ने लिखा, 21वीं सदी की विकास यात्रा में भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में हम अपने लोकतंत्र को और सशक्त बनाने वाली एक बड़ी पहल के साक्षी बनेंगे। यह वह अवसर है, जब समानता, समावेशन और जनभागीदारी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता एक नए रूप में सामने आएगी। इस समय देश की संसद एक अहम जिम्मेदारी निभाने जा रही है ऐसा कदम उठाने की, जो लोकतंत्र को और अधिक व्यापक तथा प्रतिनिधिक बनाए। यह निर्णय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई ऊर्जा देगा और लोकसभा व विधानसभाओं में उनकी उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा।
यह समय इसलिए भी खास है क्योंकि देश का माहौल उत्सव, नवाचार और सकारात्मकता से भरा हुआ है। अलग-अलग राज्यों में कई पर्व मनाए जाने वाले हैं असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में महा बिशुबा पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख, केरल में विषु, तमिलनाडु में पुथांडु और पंजाब व उत्तर भारत में बैसाखी। ये सभी त्योहार नई उम्मीद और उत्साह का संदेश लेकर आते हैं। मैं देश और दुनिया में इन पर्वों को मनाने वाले सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और कामना करता हूं कि ये अवसर सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लाएं।
इसी दौरान 11 अप्रैल से महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के कार्यक्रम शुरू होंगे और 14 अप्रैल को हम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाएंगे। ये दोनों महान विभूतियां हमें सामाजिक न्याय और मानव गरिमा के मूल्यों की याद दिलाती हैं, जिन्होंने आधुनिक भारत की दिशा तय की है।
इन प्रेरणादायक अवसरों के बीच 16 अप्रैल को संसद का एक ऐतिहासिक सत्र आयोजित होगा, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करने का प्रयास किया जाएगा। इसे केवल एक विधायी प्रक्रिया मानना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा। यह देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतीक है।
पीएम मोदी(PM Modi) ने लिखा, नारी शक्ति हमारे देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है और उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है। आज महिलाएं विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल, सशस्त्र बलों, संगीत और कला सहित हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। वे देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
हमारी परंपरा भी यही सिखाती है कि समाज तभी आगे बढ़ता है, जब महिलाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं। इसी सोच के साथ पिछले वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन या बुनियादी सुविधाएं।
फिर भी, यह सच है कि राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी उनकी वास्तविक भागीदारी के अनुरूप नहीं है। इस कमी को दूर करना आवश्यक है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न केवल निर्णय प्रक्रिया बेहतर होती है, बल्कि शासन की गुणवत्ता भी मजबूत होती है। यह सिर्फ प्रतिनिधित्व का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, संतुलित और उत्तरदायी बनाने का प्रयास है।
बीते दशकों में इस दिशा में कई प्रयास हुए, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। हालांकि, इस बात पर हमेशा सहमति रही है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए। सितंबर 2023 में संसद द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पारित होना एक ऐतिहासिक कदम था। अब आवश्यकता है कि आने वाले चुनावों में इन प्रावधानों को लागू किया जाए।
पीएम मोदी(PM Modi) ने आगे लिखा, महिलाओं को आरक्षण देना हमारे संविधान की मूल भावना से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें समानता और न्याय का विचार निहित है। यह कदम उस सोच को व्यवहार में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जिसमें हर नागरिक को समान अवसर मिले।
अब इस निर्णय को और टालना उचित नहीं है। दशकों से इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि इसे और टाला गया, तो इसका मतलब होगा कि हम उस असंतुलन को बनाए रख रहे हैं, जिसे हम स्वयं पहचानते हैं।
आज भारत आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि हमारी संस्थाएं भी समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करें। इससे न केवल एक लंबे समय से लंबित संकल्प पूरा होगा, बल्कि देश के विकास को भी गति मिलेगी।
यह विषय किसी एक दल या सरकार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का है। हमें मिलकर इस ऐतिहासिक कदम का महत्व समझना होगा और इसे साकार करना होगा। महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए व्यापक सहमति जरूरी है और इसे राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
ऐसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि कुछ निर्णय अपने समय से कहीं बड़े होते हैं और आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं। यही लोकतंत्र की असली ताकत है—समय के साथ खुद को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाना। संसद का यह महत्वपूर्ण सत्र निकट है। मैं सभी दलों के सांसदों से आग्रह करता हूं कि वे नारी शक्ति के इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करें और जिम्मेदारी के साथ इस ऐतिहासिक दायित्व को निभाएं।