नकली दवाएं
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छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं का काला कारोबार अब किसी छिपे रहस्य की तरह नहीं रहा। यह एक खुला सच बन चुका है, जिसकी परतें लगातार मीडिया और खोजी पत्रकारिता के ज़रिए सामने आ रही हैं। बीते छह वर्षों से इस गंभीर मुद्दे को उजागर किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन पर कार्रवाई की ज़िम्मेदारी है, वही संदेह के घेरे में खड़े नज़र आ रहे हैं।
🧪 कैसे फैला नकली दवाओं का जाल?
राज्य के कई इलाकों में नकली दवाओं का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। दवा दुकानों और गोडाउन के नाम पर ऐसे ठिकाने बनाए गए हैं, जहाँ से आम जनता की ज़िंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रमुख इलाके जहाँ नकली दवाओं के गोडाउन बताए जा रहे हैं:
- देवेंद्र नगर
- कटोरातालाब
- तेलीबांधा
- टाटीबंध
- गोगांव
- भनपुरी
- संतोषी नगर
- फाफाडीह
- रामनगर
इन इलाकों में केवल दिखावे के लिए लाइसेंस लेकर दफ्तर खोले गए, जबकि असल काम नकली दवाओं की सप्लाई का है।
🚨 ड्रग कंट्रोल विभाग पर गंभीर आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब-जब नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई हुई, वह मीडिया की दबाव और खबरों के बाद ही संभव हो पाई। सारंगढ़ में लाखों रुपये की नकली दवाओं की जब्ती इसका बड़ा उदाहरण है।
लेकिन आरोप यह भी हैं कि:
- छापे के बाद मामलों को दबाने की कोशिश की जाती है
- आरोपी कारोबारियों से सेटिंग की जाती है
- कार्रवाई के नाम पर लीपापोती होती है
🎥 स्टिंग ऑपरेशन से मचा हड़कंप
हाल ही में एक बड़े मीडिया संस्थान के स्टिंग ऑपरेशन ने पूरे सिस्टम को हिला दिया। वीडियो में कथित तौर पर एक एडिशनल ड्रग कंट्रोल अधिकारी को नकली दवा मामले के आरोपी के परिजन के साथ होटल में बातचीत करते देखा गया।
वीडियो सामने आने के बाद:
- अधिकारी और आरोपी पक्ष मौके से निकलते दिखे
- सफाई में इसे “सामान्य मुलाकात” बताया गया
- सोशल मीडिया पर वीडियो जमकर वायरल हुआ
⚠️ आम जनता पर असर
नकली दवाओं का सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को हो रहा है।
- सही इलाज नहीं मिल पाने से बीमारियाँ बढ़ रही हैं
- हर साल कई लोगों की बेमौत मौत हो रही है
- बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों पर सबसे ज़्यादा असर