छत्तीसगढ़ में बड़ा एक्शन: 311 दिन गायब कांस्टेबल बर्खास्त, फर्जी हाजिरी घोटाला बेनकाब, चार अधीक्षक सस्पेंड

निलंबन


छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर सख्ती का बड़ा संदेश सामने आया है। अलग-अलग जिलों में लापरवाही, फर्जीवाड़ा और गैरहाजिरी के मामलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई है। पुलिस, शिक्षा और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरी है। इन मामलों ने सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

311 दिन ड्यूटी से गायब कांस्टेबल बर्खास्त

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में एक पुलिस आरक्षक पर बड़ी कार्रवाई हुई है।

  • आरक्षक राहुल शर्मा 5 अप्रैल 2025 से बिना अनुमति गैरहाजिर थे।
  • जांच में कुल 311 दिनों की अनुपस्थिति सामने आई।
  • विभागीय नोटिस के बावजूद वे जांच में शामिल नहीं हुए।
  • सेवा रिकॉर्ड में पहले भी 14 बार गैरहाजिरी दर्ज थी।

लगातार अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति उदासीनता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने उन्हें सेवा से अलग करने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई विभाग में सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

शराब पीकर पढ़ाने वाले शिक्षक निलंबित

बस्तर जिले में शिक्षा विभाग ने भी कड़ा रुख अपनाया है।

  • सहायक शिक्षक अंशुराम कमार पर शराब सेवन कर अध्यापन करने का आरोप।
  • शासकीय आदेशों की अवहेलना और लापरवाही की पुष्टि।
  • छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कार्रवाई।
  • तत्काल प्रभाव से निलंबन और मुख्यालय परिवर्तन।

निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बीजापुर में फर्जी हाजिरी और राशन घोटाला

बीजापुर के पोटाकेबिन आवासीय विद्यालयों में बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हुआ है।

  • कागजों में 100% उपस्थिति, जबकि वास्तविकता में आधे छात्र भी नहीं।
  • जुलाई से अक्टूबर के बीच बड़ी संख्या में छात्र अनुपस्थित।
  • फर्जी उपस्थिति दर्ज कर राशन और मेस शुल्क की निकासी।
  • शिष्यवृत्ति राशि में भी अनियमितता के संकेत।

जांच के बाद चार प्रभारी अधीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

पशु चिकित्सा अधिकारी भी सस्पेंड

दुर्ग संभाग में पशु चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी पर भी कार्रवाई हुई है।

  • समीक्षा बैठकों में लगातार अनुपस्थिति।
  • अद्यतन जानकारी देने में असमर्थता।
  • मुख्यालय से बिना अनुमति महाराष्ट्र में मौजूदगी।
  • शासकीय योजनाओं की रिपोर्ट में लापरवाही।

गंभीर कदाचार मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।


प्रशासन का कड़ा संदेश

इन सभी मामलों में एक बात साफ है—लापरवाही और भ्रष्टाचार पर अब सीधी कार्रवाई हो रही है।

  • बार-बार गैरहाजिरी अब बर्दाश्त नहीं।
  • फर्जी हाजिरी और वित्तीय गड़बड़ी पर सख्ती।
  • अनुशासनहीनता पर तुरंत निलंबन।

सरकार और प्रशासन की इस कार्रवाई को सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे और मामलों की जांच तेज होने की संभावना है।

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