300 करोड़ के आबकारी टेंडर पर सियासी घमासान: कांग्रेस ने उठाए गड़बड़ी के आरोप, सरकार ने कहा निराधार

आबकारी टेंडर


रायपुर: छत्तीसगढ़ में 300 करोड़ रुपये के आबकारी टेंडर पर सियासी विवाद तेज

छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग के 300 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। टेंडर के मैनपावर और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित ठेकों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बन गई है। कांग्रेस ने टेंडर में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं, जबकि राज्य सरकार ने इसे पूरी तरह निराधार बताया है।

क्या है मामला?

  • आरोपों का आधार:
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि मैनपावर सप्लाई और सुरक्षा व्यवस्था के लिए दो कंपनियों—SIS Cash Services Limited और Duster Total Solutions Services Private Limited—का चयन किया गया है। इन दोनों कंपनियों के मालिक एक ही व्यक्ति से जुड़े होने का आरोप है। कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े टेंडर में इस प्रकार का चयन पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
  • दीपक बैज का आरोप:
    • बैज ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा छत्तीसगढ़ को “एटीएम” की तरह इस्तेमाल कर रही है।
    • उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग के टेंडर में नियमों की अनदेखी करते हुए भाजपा के एक राष्ट्रीय सचिव से जुड़ी कंपनी को ठेका दिया गया है।
    • इस टेंडर प्रक्रिया में 148 कंपनियां शामिल हुई थीं, लेकिन चयनित कंपनियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
  • सरकार का जवाब:
    • इस मामले पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों को “बेबुनियाद” और “निराधार” बताया।
    • उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों और पारदर्शिता के अनुसार हुई है।
    • साव ने यह भी बताया कि शिकायत के बाद विभाग ने संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
    • भाजपा ने कांग्रेस को तंज करते हुए कहा कि जब उनके शासन में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था फैली थी, तब उन्हें हर जगह गड़बड़ी नजर आती है।
    • उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार काम कर रही है।

सियासी जंग: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

कांग्रेस और भाजपा के बीच यह विवाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक गर्मी को बढ़ा रहा है। भाजपा जहां अपनी पारदर्शिता और नियमों के पालन का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस ने इस टेंडर प्रक्रिया में घोटाले का आरोप लगाया है। दोनों पार्टियों के नेता इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं और स्थिति अब ज्यादा गंभीर हो गई है।

राजनीतिक हलचल के बीच क्या हो रहा है?

  • प्रभाव: यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ी हलचल का कारण बन सकता है, क्योंकि आबकारी विभाग का टेंडर राज्य सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।
  • विकास और पारदर्शिता: कांग्रेस ने जहां विकास के नाम पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा पारदर्शिता और विकास के लिए अपने काम को प्रमुख बता रही है।
  • निष्पक्ष जांच की मांग: कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि स्थिति साफ हो सके और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

अगला कदम क्या होगा?
राज्य सरकार ने हालांकि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच की बात कही है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच पर कुछ और अहम घोषणाएं हो सकती हैं।

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