राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते पॉलूशन से मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने मंगलवार को हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के परिवहन मंत्रियों को पत्र लिखकर गुजारिश की कि वे अपने राज्यों से डीजल बसों को राष्ट्रीय राजधानी में दाखिल ना होने दें। सुनिश्चित करें कि ग्रैप के दूसरे चरण के प्रतिबंधों के मद्देनजर उनके राज्यों से डीजल बसें दिल्ली ना आएं।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली के अंदर अलग-अलग जो हाटस्पाट हैं उनके निरीक्षण के दौरान मैंने यह देखा कि आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से अधिक है जबकि अन्य हॉट स्पॉट पर यह 300 के आस-पास है। इस बढ़ते एक्यूआई का मूल कारण पास के राज्यों से दिल्ली में आने वाली डीजल की बसें हैं। दिल्ली में जो बसें चलती हैं वह सीनएजी और इलेक्ट्रिक हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली से सटे राज्यों की सरकारों को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया है कि जबतक दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है, वे अपनी डीजल बसों के स्थान पर सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों को ही भेजें। दिल्ली में वायु गुणवत्ता में गिरावट के कारण ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के दूसरे चरण के प्रतिबंध सुबह आठ बजे से लागू हो गए।
राय ने अपने पत्रों में कहा कि इस वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है जिसकी मुख्य वजह इन राज्यों से दिल्ली पहुंचने वाली डीजल बसों की बड़ी संख्या है। डीजल उत्सर्जन का वायु गुणवत्ता पर प्रभाव सर्वविदित है और ऐसी बसों का बड़ी संख्या में यहां आना दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब होने का महत्वपूर्ण कारण है, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा होता है।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी पहले से ही खराब वायु गुणवत्ता से जूझ रही है और अंतरराज्यीय यातायात का अतिरिक्त बोझ स्थिति को और खराब कर रहा है। इसके मद्देनजर, मैं आपके कार्यालय से अनुरोध करता हूं कि वह डीजल बसों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने या उनके उत्सर्जन मानदंडों को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू करने पर विचार करें।