महिला पहनावे पर प्रदीप मिश्रा की सलाह : अपनी सुरक्षा के लिए अपने पहनावे पर ध्यान दे

जयपुर. राजस्थान के जयपुर स्थित विद्याधर नगर स्टेडियम में चल रही शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने ऐसा बयान दे डाला, जिसने सुनने वालों के होश उड़ा दिए। उन्होंने लड़कियों और महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए अपने पहनावे पर ध्यान देने की सलाह दी है। प्रदीप मिश्रा ने तुलसी के पौधे की जड़ का उदाहरण देते हुए कहा, “जैसे तुलसी की जड़ दिखे तो वह सूख जाती है, वैसे ही लड़कियों की नाभि भी शरीर की जड़ है, इसे ढंककर रखना चाहिए। जितना ढंका रहेगा, उतनी सुरक्षा बनी रहेगी।”

इतना ही नहीं, उन्होंने अपराधों के बढ़ने का ठीकरा पहनावे पर फोड़ते हुए कहा, “आज के समय में क्राइम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि पहनावा बिगड़ गया है। सरकार या पुलिस कुछ नहीं कर सकती, संस्कार ही क्राइम रोक सकते हैं।”

प्रदीप मिश्रा ने चंचला देवी की कहानी सुनाते हुए महिलाओं को ‘सभ्य पहनावे’ की नसीहत दी। साथ ही यह भी कहा कि दो बड़ी समस्याएं हैं – खाना और कपड़ा। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी पर भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि अब चार अवस्थाएं नहीं बचीं, केवल दो ही बची हैं – बचपन और बुढ़ापा। “मोबाइल ने बच्चों को समय से पहले जवान बना दिया है।”

बेलपत्र से गांठ का इलाज का दावा

कथा के बीच में मिश्रा ने एक घरेलू इलाज का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अगर शरीर में कोई गांठ हो तो डॉक्टर को दिखाओ, लेकिन साथ में एक बेलपत्र खा लो। डॉक्टर शिव का रूप हैं, इलाज लो और बेलपत्र से गांठ बाहर निकल जाएगी।

धूप में बेहाल लोग, चोरों की चांदी

शिव महापुराण कथा को सुनने हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, लेकिन इस भीड़ का फायदा चोरों ने भी जमकर उठाया। यूपी और पंजाब से आई महिला चोर गैंग ने सोने की चेन, मोबाइल, पर्स सब पार कर दिए। सुरक्षा के लिए पुलिस को यहां सादा वर्दी में जवान तैनात करने पड़े।

ट्रैफिक जाम और धूप का कहर

स्टेडियम के आसपास ट्रैफिक डायवर्जन करना पड़ा। कथा सुनने आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के आगे पंडाल छोटा पड़ गया और हजारों लोग बाहर तेज धूप में खड़े नजर आए। राहत की बात रही कि गुरुवार को हुई बारिश से शुक्रवार को गर्मी थोड़ी कम रही।

नेताओं की हाजिरी भी रही खास

कथा में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा, विधायक कालीचरण सर्राफ और मंत्री गौतम दक भी पहुंचे। दीया कुमारी बोलीं, “यह मेरा सौभाग्य है कि मेरे क्षेत्र में यह आयोजन हो रहा है।”

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