धान खरीदी घोटाला
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छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर एक गंभीर घोटाले का मामला सामने आया है। आरंग विकासखंड के भलेरा सहकारी समिति में धान की बोरियों में पाइप के जरिए पानी डालने की घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। इस मामले में समिति के चार कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, और अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
वीडियो ने खोला मामला
यह घटना तब उजागर हुई जब धान की बोरियों में पानी डालने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में साफ दिख रहा था कि कर्मचारी जानबूझकर बोरियों का वजन बढ़ाने के लिए पानी डाल रहे थे, जिससे सरकारी खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी हो सकती थी। वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश फैल गया, और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने के लिए समिति परिसर के सामने धरना-प्रदर्शन करने पहुंचे।
किसानों का आरोप और प्रशासन की कार्रवाई
किसानों का आरोप था कि इस प्रकार की धोखाधड़ी न केवल सरकारी व्यवस्था को बदनाम करती है, बल्कि उन ईमानदार किसानों के साथ भी अन्याय होता है, जो सही तरीके से अपना धान बेच रहे होते हैं। किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एक जांच टीम गठित की। इस टीम में आरंग विकासखंड के सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के शाखा प्रबंधक नरेंद्र चंद्राकर, और प्राधिकृत अधिकारी लीलूराम साहू शामिल थे।
बर्खास्त किए गए कर्मचारी
जांच टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट संबंधित आयुक्त को सौंप दी। रिपोर्ट में यह पाया गया कि समिति के चार कर्मचारी लापरवाही और अनियमितता में शामिल थे। इन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्त कर्मचारियों में समिति प्रबंधक विष्णु साहू, लिपिक उमेश साहू, चौकीदार इंदरमन निषाद, और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जितेंद्र कुमार साहू शामिल हैं।
एफआईआर की तैयारी
सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना ने बताया कि किसानों से मिली शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर जांच की गई और रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है। जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब इन कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगामी कार्रवाई और किसान संगठनों की मांग
इस घटना के बाद धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि प्रदेशभर की समितियों में सख्ती से निगरानी की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके। किसानों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, बल्कि किसानों का भरोसा भी टूटता है।