दिल्ली पुलिस की ओर से शहर के कई हिस्सों में लगाई गई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। 30 अक्टूबर से 5 नवंबर तक के लिए दिए गए निषेधाज्ञा के आदेश के सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी गई है। कालकाजी मंदिर के पुजारी और मानस नमन सेवा सोसाइटी के सचिव सुनील ने याचिका दायर करते हुए दावा किया है कि इससे धार्मिक जुटान और रामलीला के आयोजन में बाधा उत्पन्न हो गई है।
बीएनएस की धारा 163 आईपीसी की धारा 144 की तरह ही है जिसमें पांच से अधिक लोगों के एकत्रित होने की मनाही होती है। मानस नमन सेवा सोसाइटी की ओर से चिराग दिल्ली के सतपुला मैदान में भव्य रामलीला का आयोजन किया जाता है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील ने अपनी याचिका में कहा है कि पुलिस के आदेश की वजह से रामलीला का आयोजन नहीं हो सकता है, जिसकी शुरुआत 3 अक्टूबर से होनी है।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्टूबर से होने जा रही है। पुलिस की ओर से जारी किए गए आदेश से त्योहारों और धार्मिक जुटान में बाधा होगी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि निषेधाज्ञा का आदेश जारी करने के लिए कोई ठोस वजह नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया गया है जिनमें सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि निषेधाज्ञा का आदेश रूटीन मामले में जारी नहीं किया जा सकता है।