रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर पीएम मोदी का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि एक महीने पहले ही वो रूस के दौरे पर गए थे. पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर रूसी मीडिया में काफी चर्चा है.
रूस के सरकारी टीवी चैनल RT ने ब्लूमबर्ग के हवाले से लिखा कि ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कीव और मॉस्को के बीच बातचीत के इच्छुक हैं लेकिन वो संघर्ष को खत्म करने के लिए मध्यस्थता करने की कोशिश नहीं करेंगे.’
रूसी न्यूज चैनल ने आगे लिखा, ‘फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के सैन्य ऑपरेशन शुरू होने के बाद से भारत ने हमेशा बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया है. हालांकि, अब तक इसने कोई पीस प्लान सामने नहीं रखा है. मोदी ने संघर्ष को खत्म करने के लिए एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने से कथित तौर पर इनकार किया है.’
रूसी चैनल ने लिखा कि हालांकि, मोदी यूक्रेन में सुरक्षा कारणों से कुछ घंटे ही रुकेंगे. जून में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के शांति शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले देशों में भारत भी शामिल था लेकिन भारत ने अंतिम घोषणा पर हस्ताक्षर नहीं किया था.
रूसी टीवी चैनल की रिपोर्ट में पीएम मोदी के यूक्रेन में कुछ घंटे रुकने का जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि पीएम मोदी जब रूस आए थे तब रूसी राष्ट्रपति से उनकी घंटों बातचीत हुई थी. रिपोर्ट में लिखा गया, ‘रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत, जो कि कई घंटों तक चली, में मोदी ने जोर दिया कि संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं किया जा सकता.’
रूसी न्यूज एजेंसी Tass ने भी पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर कई रिपोर्ट्स छापी हैं. अखबार ने लिखा कि यूक्रेन दौरे में भारतीय प्रधानमंत्री यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा करेंगे. उप विदेश मंत्री तन्मय लाल के हवाले से तास ने लिखा कि भारत संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से बातचीत जारी रखेगा.
अखबार ने लिखा, ‘उप विदेश मंत्री तन्मय लाल ने पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे की घोषणा करते हुए जुलाई में पीएम मोदी के रूस दौरे को भी याद दिया.’
पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर अमेरिकी न्यूज नेटवर्क सीएनएन ने लिखा कि मॉस्को में पुतिन को गले लगाने के लिए यूक्रेन ने भारतीय पीएम की निंदा की थी और अब इसके कुछ हफ्तों बाद ही वो यूक्रेन का दौरा करेंगे.
अखबार ने लिखा कि पीएम मोदी का आगामी दौरा बेहद अहम समय में हो रहा है जब यूक्रेनी सैनिक रूसी क्षेत्र में घुस गए हैं.
यूक्रेनी सैनिक बीते दो हफ्तों से अधिक समय से रूस के कुर्स्क इलाके में मौजूद हैं. हालांकि, यूक्रेन का कहना है कि यूक्रेन रूस पर कब्जा करने में दिलचस्पी नहीं रखता बल्कि इस कार्रवाई का मकसद रूस को बातचीत की टेबल पर लाना है.
सीएनएन ने पीएम मोदी के रूस दौरे पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की कड़ी प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए लिखा है, ‘यूक्रेनी नेता ने पुतिन-मोदी की मुलाकात को भारी निराशा बताया था और उन्होंने कहा था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नेता का एक खूनी अपराधी को गले लगाना शांति प्रयासों को बड़ा झटका है.’
8 जुलाई को जिस दिन पीएम मोदी रूस पहुंचे, उसी दिन यूक्रेन में बच्चों के सबसे बड़े अस्पताल पर रूसी हमला हुआ था जिसमें चार बच्चों समेत कम से कम 42 लोग मारे गए थे.
वहीं, अमेरिकी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मोदी के यूक्रेन दौरे के संबंध में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट को शीर्षक दिया है- पुतिन को फटकार लगाने के कुछ हफ्ते बाद मोदी 23 अगस्त को यूक्रेन का दौरा करेंगे.’
रॉयटर्स ने लिखा, ‘भारतीय विश्लेषकों का कहना है कि मोदी के यूक्रेन दौरे का मकसद पिछले महीने मोदी के रूस दौरे से हुए नुकसान की भरपाई करना हो सकता है. जिस दिन उनका दौरा शुरू हुआ, उसी दिन यूक्रेन में बच्चों के अस्पताल पर रूसी हमला हुआ था जिससे मोदी को शर्मिंदगी महसूस हुई थी और राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी उनकी आलोचना की थी.’
न्यूज एजेंसी ने आगे लिखा कि भारत, हालांकि, कहता रहा है कि उसके रूस और यूक्रेन दोनों के साथ स्वतंत्र रिश्ते हैं. उप विदेश मंत्री तन्मय लाल ने कहा, ‘दोनों देशों के साथ हमारे रिश्ते एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं, ये व्यापक रिश्ते हैं.’
रॉयटर्स ने आगे लिखा कि मोदी के रूस दौरे के दिन ही रूस ने यूक्रेन में बच्चों के अस्पताल पर स्ट्राइक किया जिसे लेकर मोदी ने पुतिन को ‘फटकार’ लगाई. मोदी ने पुतिन से कहा कि बच्चों की मौत दर्दनाक और भयानक थी. रूस-यूक्रेन को बातचीत और कूटनीति से अपने संघर्ष को सुलझाना चाहिए.
पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे को लेकर कई विश्लेषकों का कहना है कि रूस दौरे के बाद पश्चिमी देशों के साथ संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है. भारत यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह किसी खेमे में शामिल नहीं है और अपने हितों के अनुसार ही कूटनीतिक फैसले लेगा.
हालांकि, कुछ विश्लेषक पीएम मोदी के यूक्रेन के दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं. जाने-माने रणनीतिक विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि पीएम मोदी के यूक्रेन जाने की टाइमिंग गलत है और इसका कोई स्पष्ट उद्देश्य भी नहीं है.
उन्होंने लिखा, ‘मोदी की 23 अगस्त की कीव यात्रा सिर्फ गलत समय पर नहीं है; इसका उद्देश्य भी स्पष्ट नहीं है. यूक्रेन की (रूस में) घुसपैठ से युद्धविराम प्रयासों को गंभीर झटका लगा है. सिर्फ इसलिए कि किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने यूक्रेन की आजादी के बाद से यूक्रेन का दौरा नहीं किया है, युद्ध में बढ़ते तनाव के बीच मोदी के कीव जाने का कोई अच्छा कारण नहीं है.’