प्रियंका मंडल
प्रियंका मंडल: कम्प्यूटर कोचिंग से भविष्य को संवारने वाली प्रेरणा
रायपुर: आज के डिजिटल युग में, जहां हर क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा की मांग बढ़ रही है, वहां बस्तर जिले की प्रियंका मंडल ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से यह साबित किया कि अगर सही दिशा में कदम उठाए जाएं, तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। प्रियंका ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना का लाभ उठाकर अपना कम्प्यूटर कोचिंग सेंटर स्थापित किया और न केवल अपने परिवार को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गईं।
प्रियंका का संघर्ष और सफलता
प्रियंका मंडल, जो बस्तर जिले के पंडरीपानी गांव की निवासी हैं, ने अपनी शैक्षिक यात्रा स्नातकोत्तर तक पूरी की। पहले, प्रियंका एक संविदा कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रही थीं, लेकिन उनका सपना कुछ बड़ा करने का था। प्रियंका को शुरू से ही कम्प्यूटर के क्षेत्र में गहरी रुचि थी, और उन्होंने महसूस किया कि तकनीकी शिक्षा आज के समय में एक बड़ी आवश्यकता है।
प्रियंका ने देखा कि बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों के कई बच्चे कम्प्यूटर सीखना चाहते थे, लेकिन शहरों में जाने में आने वाली परेशानियों और खर्च के कारण वे शिक्षा से वंचित रह जाते थे। इस समस्या को सुलझाने के लिए प्रियंका ने कम्प्यूटर कोचिंग सेंटर खोलने का निर्णय लिया, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इसमें आड़े आ रही थी।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना से मिली मदद
प्रियंका को अपने मित्र से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से संपर्क किया और योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रियंका ने आवश्यक दस्तावेज जमा कर ऋण के लिए आवेदन किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 7 लाख रुपये का ऋण 20 जून 2025 को भारतीय स्टेट बैंक पण्डरीपानी शाखा से प्राप्त हुआ।
9 महीने में सफलता की ओर
प्रियंका ने अपने कम्प्यूटर कोचिंग सेंटर की शुरुआत की और अब लगभग 9 महीने में उन्होंने 20 विद्यार्थियों को सफलतापूर्वक कम्प्यूटर प्रशिक्षण दिया है। इसके अलावा, प्रियंका ने अपने संस्थान के माध्यम से तीन युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। प्रियंका नियमित रूप से ऋण की किस्तों का भुगतान भी कर रही हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि वह अपने वित्तीय दायित्वों को भी कुशलतापूर्वक निभा रही हैं।
क्षेत्रीय युवाओं के लिए एक दिशा
प्रियंका मंडल की यह पहल न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि बस्तर के ग्रामीण युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। प्रियंका ने बताया कि स्नातकों को सॉफ्टवेयर कौशल विकसित करने, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान बढ़ाने, और नवीनतम तकनीकी रुझानों से अवगत रहने की आवश्यकता है ताकि वे अपने क्षेत्र में प्रासंगिक बने रहें और अपने पेशेवर विकास को बढ़ावा दे सकें।
प्रियंका मंडल की सफलता यह साबित करती है कि अगर किसी को सही दिशा और योजना मिले तो वह अपनी मेहनत और संकल्प से किसी भी चुनौती को पार कर सकता है। प्रियंका की कहानी यह बताती है कि आत्मविश्वास और योजना के सही उपयोग से कोई भी सपना साकार हो सकता है।