रक्षक बना भक्षक: बस्तर के जंगलों में युवा बाघ की दर्दनाक मौत, डिप्टी रेंजर का नाम शिकारी गिरोह में

बस्तर शिकारी गिरोह

बस्तर और बीजापुर के जंगलों से सामने आई एक दिल दहला देने वाली कहानी न केवल वन्यजीवों की मौत की है, बल्कि सिस्टम की नाकामी की भी चीख है। जंगल में दो वन्य जीव—एक बाघ और एक तेंदुआ—की मौत हुई, लेकिन यह गोली से नहीं, बल्कि एक क्रूर साजिश के तहत हुई। इन दोनों वन्य जीवों को तार के फंदों में फंसा दिया गया था, जिससे वे 2-3 दिन तक तड़पते रहे और आखिरकार दम तोड़ दिया।

डिप्टी रेंजर का नाम सामने आया

इस मामले में एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि दंतेवाड़ा वन विभाग का डिप्टी रेंजर, देवी प्रसाद कोयाम, इस शिकारी गिरोह का हिस्सा निकला है। यह एक ऐसा नाम था जिस पर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, लेकिन अब वही शिकारियों के साथ मिलकर वन्यजीवों के खात्मे में शामिल था। इस घटना ने सवाल खड़ा किया है कि जब जिम्मेदार ही शिकारी बन जाएं तो जंगल की सुरक्षा कैसे संभव है?

उड़नदस्ता टीम ने पकड़े 9 आरोपी

वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो बाघ और तेंदुए की खाल को रायपुर ले जाकर बेचने की फिराक में थे। पकड़ी गई खाल और अन्य सबूतों से यह साफ हो गया कि यह शिकार हाल ही में हुआ था। मारे गए बाघ की उम्र केवल 3 साल थी, और उसकी दहाड़ अब कभी सुनाई नहीं देगी। इस घटना ने बस्तर के जंगलों की खामोशी को और भी गहरा कर दिया है।

क्रूर शिकार के तरीके

विशेषज्ञ बताते हैं कि शिकारियों ने पुराने और क्रूर तरीकों का इस्तेमाल किया। मांस के लालच में तार के फंदे बाघ और तेंदुए के गले में कस दिए गए थे, जिससे वे तड़पते हुए मर गए। यह तरीका बहुत दर्दनाक और अत्यंत अमानवीय था, जो जानवरों की न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक यातना का कारण बना।

सिस्टम की नाकामी पर सवाल

यह घटना सिर्फ वन्यजीवों की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की नाकामी को भी उजागर करती है। सवाल अब केवल शिकार का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा पर टिका था। जब वही जिम्मेदार लोग शिकारियों के साथ मिलकर काम करने लगे, तो जंगल की सुरक्षा किसके भरोसे होगी?

क्या अब जंगल सुरक्षित हैं?

बस्तर के जंगल आज खामोश हैं, लेकिन इस खामोशी में एक सवाल लगातार गूंज रहा है—क्या अब भी जंगल सुरक्षित हैं? या फिर शिकार का खेल अब सिस्टम के भीतर तक फैल चुका है? यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि जब तक जिम्मेदार लोग अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ लेंगे, तब तक वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगलों का भविष्य अंधकारमय रहेगा।

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