बांग्लादेश में चिन्मय प्रभु की रिहाई के लिए भारत में संतों का हल्लाबोल, बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा और साधु-संतों के दमन के खिलाफ भारत में गुस्सा फूटने लगा है। पश्चिम बंगाल से साधु-संतों के एक समूह ने हिन्दू नेता की गिरफ्तारी के खिलाफ भारत-बांग्लादेश की सीमा पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। 24 परगना पेट्रोपोल सीमा चौकी से करीब 800 मीटर पर पहुंचे साधु-संतों ने जबरदस्त नारेबाजी करते हुए हिन्दू आध्यात्मिक नेता की रिहाई की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेशी अंतरिम सरकार से अपील की कि वह अपने देश में हिन्दुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।

अखिल भारतीय संत समिति के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए साधु-संत सुबह से ही धरना स्थल पर पहुंचने लगे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक इस कार्यक्रम में पूरे पश्चिम बंगाल से आए साधु-संतों ने बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ अपनी बात रखी। पेट्रोपोल सीमा पर पहुंचे एक भिक्षु ने कहा,” सीमा के पास जाकर हम मानव श्रृंखला बनाएंगे। हिन्दुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को लेकर विरोध करते हुए हम भारत सरकार, बांग्लादेश सरकार को शांति का संदेश देंगे। उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह वहां पर हिन्दुओं के खिलाफ होने वाले हमलों को रोके।

अखिल भारतीय संत समिति की बंगाल शाखा के अध्यक्ष स्वामी परमात्मानंद ने रविवार को कहा था कि पेट्रोपोल सीमा पर आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक बांग्लादेश सरकार हिंदुओं और मंदिरों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करती। दूसरी तरफ इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) पिछले कुछ दिनों से कोलकाता के अल्बर्ट रोड स्थित अपने केंद्र में प्रार्थना सभाओं और कीर्तनों का आयोजन कर रहा है। समूह दास की रिहाई की मांग कर रहा है और पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की है।

इससे इतर विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा ने भी पेट्रोपोल सीमा पर बुधवार को धरना प्रदर्शन की घोषणा की है। भाजपा के साथ इस प्रदर्शन में हिंदू जागरण मंच और अन्य धार्मिक समूहों के भी जुड़ने की संभावना है।

यह पूरा घटनाक्रम बांग्लादेश में हिंदू नेता इस्कॉन के चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ था। बांग्लादेशी हिन्दुओं से सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने हिन्दु हित की और उनके अधिकारों की बात करने वाले चिन्मय दास को केवल हिन्दु होने के चलते गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि बांग्लादेश सरकार की तरफ से बताया गया कि चिन्मय दास को हिन्दू होने के चलते नहीं बल्कि राजद्रोह के मुकदमें के चलते गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेशी अदालत ने इस केस के चलते चिन्मय दास को जमानत देने से इनकार कर दिया जिसके बाद बांग्लादेशी हिन्दू समुदाय ने राजधानी ढाका और चट्टग्राम सहित कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।

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