सियासत में संकेतों का अपना रोल है, अपनी भूमिका है, अपनी भाषा है. संबंधों से लेकर समीकरणों तक, बनने-बिगड़ने की इस प्रक्रिया में संकेत सबसे बड़े संदेशवाहक होते हैं. खासकर चुनावी मौसम में. हरियाणा में चुनाव हैं. 5 अक्टूबर को मतदान होना है और इससे पांच दिन पहले 30 सितंबर को ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई.
इस तस्वीर में कहने को तो राहुल गांधी से लेकर प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा तक, सभी एक-दूसरे का हाथ पकड़कर उठाए नजर आ रहे हैं. इस तस्वीर के सियासी मायने बड़े हैं. इस तस्वीर के जरिये कांग्रेस संकेत की भाषा में कौन सा संदेश देना चाहती है? इसे चार पॉइंट में समझा जा सकता है.
हरियाणा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट आने के बाद से ही कुमारी सैलजा की नाराजगी के चर्चे थे. सिरसा सांसद लगातार सीएम पद को लेकर दावेदारी कर रही थीं, विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती थीं लेकिन पार्टी ने टिकट ही नहीं दिया. एक कार्यक्रम में जातिगत टिप्पणी के बाद सैलजा ने चुनाव प्रचार से भी दूरी बना ली और चर्चे तो उनके बीजेपी में जाने के भी होने लगे थे.
सैलजा नारायणगढ़ की रैली में न सिर्फ शामिल हुईं, राहुल गांधी सैलजा और हुड्डा के हाथ उठाकर खुद पीछे हट पैचअप कराते भी नजर आए. इसके जरिये राहुल और कांग्रेस की रणनीति ‘हम साथ-साथ हैं’ का संदेश देने की है. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा भी, “हम साथ हैं तो हाथ ये, हालात बदल देगा.”
हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी जगजाहिर रही है. सत्ता में वापसी की राह में हरियाणा कांग्रेस की गुटबाजी को बड़ा रोड़ा माना जाता है. सूबे में पार्टी का संगठन नहीं, बल्कि हर नेता का अपना कैडर है. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अपने लोग हैं तो सैलजा के भी. टिकट बंटवारे के बाद हुड्डा गुट के दबदबे का संदेश और सैलजा की नाराजगी, प्रचार से दूरी हरियाणा की अनुकूल मानी जा रही पिच पर कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को कहीं नुकसान न पहुंचा दे, पार्टी नेतृत्व भी इसे समझ रहा था. अब इस तस्वीर के जरिये हुड्डा और सैलजा, दोनों ही गुट के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ ही हरियाणा के मतदाताओं को भी यह संदेश देने की कोशिश की है कि गुटबाजी कोई समस्या नहीं है.
कुमारी सैलजा की गिनती गांधी परिवार के करीबियों में होती है. टिकट बंटवारे में जिस तरह से हुड्डा गुट का दबदबा नजर आया, ये चर्चा भी शुरू हो गई थी कि क्या सैलजा की पकड़ पार्टी पर कमजोर पड़ती जा रही है. अब इस तस्वीर के जरिये कांग्रेस ने एक तरह से इस तरह की चर्चाओं पर विराम लगाने की भी कोशिश की है. तस्वीर में कुमारी सैलजा के एक तरफ प्रियंका गांधी हैं तो दूसरी तरफ खुद राहुल गांधी. यह बताता है कि गांधी परिवार के बीच सैलजा की अहमियत कम नहीं हुई है. गांधी परिवार और पार्टी पर सैलजा की पकड़ बरकरार है.
तस्वीर में देखें तो प्रियंका गांधी के बाद कुमारी सैलजा, राहुल गांधी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और फिर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल नजर आ रहे हैं. यह तस्वीर अपने आप पूरी कहानी बयान कर रही है. सैलजा जहां प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के बीच में हैं तो वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल के बीच में. यह इस बात का संकेत है कि हुड्डा को भी आलाकमान की सुननी ही होगी और चुनाव बाद सीएम पर फैसले में भी आलाकमान की ही चलेगी. हुड्डा-सैलजा, दोनों गुटों के बीच समन्वय बनाने का काम केंद्रीय नेतृत्व करेगा.