कांग्रेस के अपने कार्यक्रम में बंद हो गया राहुल का माइक, संविधान रक्षा पर बोल रहे थे नेता प्रतिपक्ष

संविधान दिवस की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस का एक कार्यक्रम हुआ. इस कार्यक्रम को राहुल गांधी संबोधित कर रहे थे. लेकिन संबोधन के बीच में ही उनका माइक बंद हो गया. उनका माइक काफी देर तक बंद रहा. लेकिन जब उनका माइक ठीक हुआ तो उन्होंने कहा कि जितना माइक बंद करना है कर लो मैं फिर भी बोलूंगा. 

राहुल ने कांग्रेस पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दलितों की बात करने पर माइक बंद कर दिया जाता है. मेरा माइक ऑफ करोगे तो मैं फिर भी बोलूंगा. मैं अपनी बात पूरी करके रहूंगा.

उन्होंने संविधान दिवस पर कहा कि संविधान अहिंसा का रास्ता दिखाता है. सविधान सत्य और अहिंसा की किताब है. संविधान हिंसा की इजाजत नहीं देता. उन्होंने कहा कि जहां भी हमारी सरकार आएगी, हम वहां जातिगत जनगणना कराएंगे. अगर पिछड़े वर्ग की हिस्सेदारी ज्यादा है तो उनकी भागीदारी कम क्यों है?

उन्होंने कहा कि आपको कंपनियों के मालिक दलित या ओबीसी नहीं मिलेंगे? उन्होंने कहा कि मैं गारंटी के साथ कहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान की किताब नहीं पढ़ी है. हिंदुस्तान की हजारों साल की सोच और 21वीं सदी में हिंदुस्तान की जो सोशल एंपावरमेंट की जो सच है, आंबेडर जी की, फूले जी की, बुद्ध भगवान, गांधी जी की वह इसके अंदर है. आप किसी भी स्टेट में चले जाइए केरल में नारायण गुरु जी, कर्नाटक में बसवन्ना जी, पुणे के शिवाजी महाराज, हर स्टेट में आपको ऐसे दो-तीन नाम मिलेंगे जिनकी सोच इस किताब में आपको मिलेगी.

राहुल ने कहा कि मैं आपसे पूछना चाहता हूं इसमें सावरकर जी की आवाज है क्या? इसमें कहीं लिखा है कि हिंसा का प्रयोग करना चाहिए. इसमें कहीं लिखा है कि किसी व्यक्ति को मारना चाहिए, डराना चाहिए या काटना चाहिए? यह सत्य और अहिंसा की किताब है. यह हिंदुस्तान का सत्य है और यह अहिंसा का रास्ता दिखाता है कुछ दिन पहले तेलंगाना में हमने जातिगत जनगणना का काम शुरू किया. जहां भी हमारी सरकार आएगी जिस स्टेट में चाहे कर्नाटक हो, तेलंगाना हो और आने वाले समय में जहां भी हमारी सरकार आएगी हम उसी प्रकार से जाति जनगणना कराएंगे.

उन्होंने कहा कि अगर हिंदुस्तान की आबादी को देखें तो पूरा देश जानता है कि देश में 15 फीसदी दलित आबादी है. आठ फीसदी आदिवासी हैं, तकरीबन 15 फीसदी अल्पसंख्यक हैं. मगर पिछड़े वर्ग के कितने लोग हैं? कोई नहीं जानता. कोई कहता है कि देश में पिछड़ा वर्ग 50 फीसदी है तो कई अलग आंकड़ा देता है. अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग आंकड़ें बताए जाते हैं. पिछड़ा वर्ग 50 फीसदी से कम नहीं है. अगर हम 50 फीसदी पिछड़ा वर्ग, 15 फीसदी दलित, तकरीबन आठ फीसदी आदिवासी और 15 फीसदी अल्पसंख्यकों को मिला लें तो देश की तकरीबन 90 फीसदी आबादी पिछड़े वर्ग से आती है.

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