रेल हादसे पर अब लगेगी लगाम, पहियों की हाईटेक गिनती से होगी पहरेदारी

भारतीय रेलवे के ट्रैक की सुरक्षा और ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. हाल के दिनों में ट्रेनों की दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए, रेलवे मंत्रालय ने ट्रैक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं. इनमें से एक महत्वपूर्ण पहल हावड़ा से धनबाद के बीच नौ स्टेशनों पर मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर तकनीक


यह अत्याधुनिक तकनीक पटरियों पर ट्रेनों की उपस्थिति या अनुपस्थिति का पता लगाने के लिए डिजाइन की गई है. जब कोई ट्रेन एक सेक्शन में प्रवेश करती है, तो यह तकनीक ट्रेन के पहियों की गिनती करती है और ट्रेन के निकलने पर भी पहियों की संख्या को रिकॉर्ड करती है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि पूरी ट्रेन बिना किसी रुकावट के सेक्शन को पार कर गई है.
यह तकनीक रेलवे परिचालन में कई महत्वपूर्ण सुधार लाने की क्षमता रखती है. इसके माध्यम से ट्रेन संचालन में सुधार के साथ-साथ सिग्नल प्रणाली की कमियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. किसी भी तरह की गड़बड़ी या असंगति की स्थिति में तुरंत अलर्ट मिल सकता है, जिससे हादसों की संभावना को कम किया जा सकेगा.


मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर तकनीक को पहले चरण में आसनसोल रेल मंडल के नौ स्टेशनों पर लागू करने की योजना बनाई गई है. इनमें कुल्टी, बराकर, कुमारधुबी, मुगमा, थापरनगर, कालूबथान, छोटा अंबाना, बासुकीनाथ, और दुमका स्टेशन शामिल हैं. इन स्टेशनों पर इस तकनीक के लागू होने से ट्रेनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है. इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 23.41 करोड़ रुपये है.


ट्रेन सुरक्षा में वृद्धि: यह तकनीक ट्रेनों की सही स्थिति का पता लगाकर हादसों की संभावना को कम करती है.
सिग्नल प्रणाली में सुधार: तकनीक सिग्नल की खामियों को पकड़ने और सुधारने में मदद करती है, जिससे ट्रेन संचालन में समय की बचत होती है.
डेटा की सटीकता: ट्रेन के पहियों की गिनती करने से सटीक डेटा प्राप्त होता है, जो ट्रैक सुरक्षा और ट्रेन परिचालन में सुधार के लिए उपयोगी है.


हावड़ा से धनबाद के बीच नौ स्टेशनों पर डिजिटल काउंटर तकनीक का उपयोग भारतीय रेलवे के ट्रैक सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस तकनीक के माध्यम से रेलवे न केवल अपने ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेगा, बल्कि ट्रेन परिचालन को भी अधिक सुरक्षित और सुचारू बना सकेगा. यह परियोजना रेलवे के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है, जो भविष्य में पूरे देश में लागू की जा सकती है.

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