राजिम कुंभ 2026: आस्था का मेला या इवेंट कंपनी का अहंकार? भूखे कलाकार, भड़के विधायक, धरने पर जनता

राजिम कुंभ अव्यवस्था


🕉️ आस्था के महापर्व में अव्यवस्थाओं का शोर

छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले राजिम कुंभ कल्प 2026 में इस बार भक्ति के साथ-साथ भारी अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। मेले के आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही इवेंट कंपनी की मनमानी और जिला प्रशासन की निष्क्रियता अब सरकार की छवि पर सीधा असर डालती नजर आ रही है।


🎤 मंच पर तालियां, पीछे भूखे कलाकार

रविवार की रात राजिम कुंभ के मुख्य मंच पर छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय लोक कलाकार आरु साहू और उनके साथी कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। श्रद्धालुओं ने तालियों से उनका स्वागत किया, लेकिन मंच के पीछे की सच्चाई बेहद शर्मनाक थी।

  • कार्यक्रम के बाद
    👉 कलाकारों को डेढ़ घंटे तक भोजन के लिए इंतजार कराया गया
  • इवेंट कंपनी की घोर लापरवाही
  • न भोजन की व्यवस्था, न कोई जवाबदेही

कला के सम्मान की जगह कलाकारों को अपमान और भूख का सामना करना पड़ा।


🧑‍⚖️ विधायक रोहित साहू का सख्त रुख

जब यह खबर राजिम विधायक रोहित साहू तक पहुंची, तो वे तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने:

  • इवेंट कंपनी
  • जिला प्रशासन
  • कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ

सभी को कड़ी फटकार लगाई।

विधायक ने साफ शब्दों में कहा:

“राजिम कुंभ हमारी आस्था और प्रदेश की पहचान है। कोई भी ठेकेदार या अधिकारी अगर सरकार की छवि खराब करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

सबसे अहम बात यह रही कि विधायक ने केवल बयानबाजी नहीं की, बल्कि सभी भूखे कलाकारों को खुद साथ लेकर निजी रेस्टोरेंट में भोजन कराया। इस मानवीय पहल की हर तरफ सराहना हो रही है।


🚧 धरने पर जनप्रतिनिधि और नगरवासी

इवेंट कंपनी की बदइंतजामी यहीं नहीं रुकी।
सोमवार दोपहर से:

  • स्थानीय जनप्रतिनिधि
  • नगरवासी
  • सामाजिक कार्यकर्ता

पुराने मेला स्थल पर धरने पर बैठ गए। यह इस सीजन में दूसरी बार है जब लोगों को विरोध के लिए सड़क पर उतरना पड़ा।


🚱 अव्यवस्थाओं की लंबी सूची

प्रदर्शनकारियों ने कई गंभीर आरोप लगाए:

  • 🚽 शौचालयों की बदहाल स्थिति
  • 🤢 गंदगी और बदबू
  • 💧 श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की कमी
  • 🗣️ पत्रकारों और आम नागरिकों से
    👉 इवेंट कंपनी कर्मचारियों का अभद्र व्यवहार

मांग साफ है:
➡️ भौतिक सत्यापन से पहले इवेंट कंपनी को एक रुपये का भी भुगतान न किया जाए।


🪑 बेरिकेट्स का राज, कुंभ या भूल-भुलैया?

इस बार राजिम कुंभ में श्रद्धालुओं को आस्था से ज्यादा बेरिकेट्स का दर्शन हो रहा है।

  • बिना तर्क जगह-जगह लोहे की बैरिकेडिंग
  • रास्ते ऐसे बंद
    👉 मानो मंच तक पहुंचने के लिए वीज़ा चाहिए
  • मुख्य मंच के सामने
    👉 खाली कुर्सियां इस “अति-मैनेजमेंट” की गवाही दे रही हैं

स्थानीय लोग पूछ रहे हैं —
“कुंभ देखने आए थे या इवेंट कंपनी का राज?”


📌 कौन है परेशान? (व्यंग्यात्मक सच)

  • कलाकार – क्योंकि कला के बदले भूख मिली
  • पत्रकार – क्योंकि सच बोलने से कंपनी को एलर्जी
  • विधायक – क्योंकि प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं
  • आम जनता – क्योंकि कुंभ में कंपनी का अहंकार हावी है

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