राशन घोटाला
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ में सरकारी राशन की खुली कालाबाजारी ने एक बार फिर प्रशासन और खाद्य विभाग की छवि को सवालों के घेरे में डाल दिया है। वार्ड 30, गोडपारा स्थित मां शेरावाली साख सहकारी समिति की दुकानों से लगातार वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें राशन के बदले हितग्राहियों को नकद भुगतान किया जा रहा है।
📍 वीडियो में क्या दिखा?
सूत्रों के अनुसार:
- दुकानदार बिना किसी डर के सरकारी चावल के बदले नकद देते दिखाई दे रहे हैं।
- पहली बार यह वीडियो 4 मई 2025 को वायरल हुआ था।
- इसके बाद 12 मई 2025 को भी इसी दुकान से संबंधित वीडियो सामने आया।
- अब तीसरी बार ताजा वीडियो सामने आया है, जिसमें वही कार्रवाई की जा रही है।
- स्थानीय लोगों का दावा है कि कई दुकानों में हितग्राहियों को अनाज देने की बजाय नकद राशि देकर सरकारी चावल बाजार में बेच दिया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि यह दुकान किराए पर दी गई है, जिससे बार-बार इस तरह की घटनाओं के वीडियो सामने आते रहते हैं।
💰 आरोपों का नेटवर्क
खाद्य विभाग और राशन विक्रेता संघ से जुड़े आरोप:
- संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ पूर्व में शिकायतें और जांच रिपोर्ट की अनुशंसा हुई थी।
- सूत्रों के अनुसार जिले में सरकारी चावल की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी के लिए एक सिंडिकेट भी काम कर रहा है।
- अधिकारियों की कथित मर्जी के चलते विभागीय जांच रिपोर्टों को दबाया जा रहा है।
- खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर मीडिया से इस मामले में जानकारी साझा करने से बचते नजर आए हैं।
❗ विभाग की चुप्पी पर सवाल
- लगातार वीडियो आने के बावजूद अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई।
- जांच रिपोर्ट में पुख्ता आरोप होने के बाद भी कालाबाजारी करने वालों को संरक्षण मिलने का आरोप है।
- विभाग के अधिकारी अब संदेह के घेरे में हैं और जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
🏷️ गंभीर सवाल
- क्या उचित मूल्य दुकानों पर हितग्राहियों को राशन नहीं मिल रहा?
- क्या सरकारी चावल का खुले बाजार में सिस्टमेटिक मुनाफाखोरी चल रही है?
- आखिरकार खाद्य विभाग की भूमिका क्या है—नियंत्रक या संरक्षण देने वाला?