RCB ही जिम्मेदार: बेंगलुरु भगदड़ पर ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट, पुलिस के पास अलादीन का चिराग नहीं

चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ केस में ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। इस भगदड़ में 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक 14 वर्षीय बच्ची भी शामिल थी। आदेश में साफ तौर पर कहा गया कि आरसीबी ने पुलिस से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी। अचानक सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, उनके पास अलादीन का चिराग थोड़े है…

ट्रिब्यूनल ने कहा कि आरसीबी ने सोशल मीडिया पर बिना पुलिस की अनुमति के विजय जुलूस का आमंत्रण पोस्ट कर दिया, जिससे भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पुलिस के पास सुरक्षा इंतज़ाम के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा। आदेश में साफ तौर पर लिखा गया, “RCB ने पुलिस से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली। अचानक सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया और इसके चलते भीड़ जमा हो गई। महज 12 घंटे में पुलिस से पूरी व्यवस्था की उम्मीद नहीं की जा सकती।”

IPS विकास कुमार की बहाली

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा, “पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, न तो भगवान और न ही जादूगर। उनके पास ‘अलादीन का चिराग’ नहीं है, जिससे वे एक झटके में सारी व्यवस्थाएं कर दें।” इसी मामले में निलंबित किए गए IPS अधिकारी विकास कुमार विकास को बड़ी राहत मिली है। ट्रिब्यूनल ने उनके निलंबन को रद्द करते हुए कहा कि उनकी निलंबन अवधि को सेवा का हिस्सा माना जाए। विकास कुमार उस वक्त बेंगलुरु के वेस्ट जोन के एडीशनल कमिश्नर और चिन्नास्वामी स्टेडियम के प्रभारी थे।

ट्रिब्यूनल ने कर्नाटक सरकार को यह सुझाव भी दिया है कि वह अन्य दो वरिष्ठ अधिकारियों बेंगलुरु के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर बी दयानंद और डीसीपी शेखर एच टेक्कण्णावर के निलंबन पर पुनर्विचार करे।

सुबूतों के अभाव में निलंबन

ट्रिब्यूनल ने कहा, “पुलिस अधिकारियों के निलंबन का निर्णय पर्याप्त सबूतों पर आधारित नहीं है। निर्णय के समय ऐसा कोई ठोस या ठोस आधार नहीं था जिससे यह साबित हो कि इन अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ।” हालांकि, सरकार चाहें तो इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती है।

भगदड़ केस के बाद राजनीतिक घमासान

4 जून को हुई इस भगदड़ के बाद से कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया विपक्ष के निशाने पर हैं। भाजपा और जेडीएस ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे “सरकार प्रायोजित भगदड़” करार दिया और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। 9 जून को कर्नाटक सरकार ने 5 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया था, जिनमें

विकास कुमार विकास, बी दयानंद (पुलिस कमिश्नर), शेखर एच टेक्कण्णावर (DCP), सी बालकृष्ण (ACP) और ए के गिरीश (इंस्पेक्टर, क्यूबन पार्क) शामिल हैं।

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