शिवलिंग पर बिच्छू वाले बयान पर मानहानि के मामले में शशि थरूर को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से राहत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने के अपने अंतरिम आदेश को बढ़ा दिया है और सभी पक्षों को अपना-अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का वक्त दिया है.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने थरूर के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी. पीठ ने दिल्ली स्टेट और शिकायतकर्ता और बीजेपी नेता राजीव बब्बर को नोटिस भेजकर चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है.
कांग्रेसी सांसद की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने के अपने अंतरिम आदेश को आगे बढ़ाते हुए कहा, इस मामले में रोक जारी रहेगी और याचिका पर सभी पक्षों को चार हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करें. इससे पहले 10 सितंबर को शीर्ष अदालत ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ आपराधिक मानहानि शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.
दरअसल, कांग्रेस नेता शशि थरूर के द्वारा PM पर दिए गए बिच्छू वाले बयान के बाद BJP नेता राजीव बब्बर ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें निचली अदालत ने उनके खिलाफ समन जारी कर किया था. निचली अदालत के समन को कांग्रेस नेता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
थरूर के वकील ने पहले अदालत में कहा कि लिट फेस्ट में अपनी किताब रिलीज करते हुए उन्होंने बस एक टिप्पणी की थी, जिसमें प्रधानमंत्री का नाम भी नहीं लिया गया था. वो तो अलंकारिक भाषा मे एक कहावत का हवाला दिया था कि शिवलिंग पर बिच्छू बैठा है. न उसे हाथ से हटा सकते हैं ना जूते से मार सकते हैं. दरअसल थरूर अंग्रेजी की एक कहावत के जरिए ऐसी स्थिति का हवाला दे रहे थे कि न जी पा रहे हैं न मर पा रहे हैं.