खंडवा के रितेश ने 75 साल पुराने पीपल का किया सफल ट्रांसप्लांट, पेड़ों को पुनर्जीवन देने का निकाला रास्ता
खंडवा: आधुनिकता की दौड़ में इंसान प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना भूलता जा रहा है, लेकिन खंडवा के पर्यावरण प्रेमी और समाजसेवी रितेश गोयल ने पेड़ों को बिना काटे उनका संरक्षण करने की अनोखी पहल की है. उन्होंने कई पुराने पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसप्लांट कर उनके जीवन को पुनर्जीवित किया है, जिसमें सबसे पहला ट्रांसप्लांट 75 साल पुराने पीपल के पेड़ का किया गया था.
75 साल पुराने पीपल का ट्रांसप्लांट
रितेश गोयल की इस अनोखी पहल की शुरुआत 75 साल पुराने पीपल के पेड़ के ट्रांसप्लांट से हुई. इस पेड़ को 16 किलोमीटर दूर छेगांव माखन में ले जाकर पुनः रोपा गया. इस प्रक्रिया में करीब तीन महीने का समय लगा. शुरुआत में इस ट्रांसप्लांट पर 1.5 लाख रुपये का खर्च आया था, लेकिन अब इस प्रक्रिया में लागत काफी कम हो गई है.
रितेश गोयल ने पहले इस तकनीक को हैदराबाद के विशेषज्ञों से सीखा. इंदौर से आए विशेषज्ञों से सलाह ली गई, लेकिन हैदराबाद के विशेषज्ञ ने इस प्रक्रिया की गारंटी दी कि पेड़ को बिना नुकसान पहुंचाए उसे सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया जा सकता है. रितेश ने बताया, “हमने पूरी प्रक्रिया को समझा और तब जाकर पेड़ को शिफ्ट करना शुरू किया. हमें पहले पेड़ों की शिफ्टिंग के लिए करीब छह महीने की अनुमति प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, क्योंकि देश में पेड़ शिफ्ट करने की कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं थी.”
शुरुआत में पेड़ शिफ्टिंग के लिए सरकारी अनुमति प्राप्त करना बड़ा संघर्ष था. अनुमति मिलने के बाद पहले ट्रांसप्लांट में 12 पेड़ शिफ्ट किए गए, जिनमें लाखों रुपये का खर्चा आया. लेकिन अब, रितेश गोयल के नेतृत्व में यह प्रक्रिया काफी सस्ती हो गई है. उन्होंने पेड़ों को शिफ्ट करने के लिए एक हेल्पलाइन भी शुरू की है, जिससे मध्य प्रदेश के किसी भी हिस्से में पेड़ों की शिफ्टिंग की जरूरत हो, तो वे तत्पर रहते हैं.
रितेश गोयल ने पेड़ कटाई के बजाय शिफ्टिंग को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. उन्होंने यह महसूस किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कितनी जरूरत थी, और पेड़ों का संरक्षण हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक है. उनके इस प्रयास ने न केवल पर्यावरण प्रेमियों को प्रेरित किया है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण बना है.
रितेश की इस पहल ने खंडवा और आसपास के क्षेत्रों में पेड़ संरक्षण के महत्व को बढ़ावा दिया है, और पेड़ों को नई जिंदगी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है.