CBI दफ्तर पहुंचे संदीप घोष, इस वजह से दूसरी बार हो रहा है पॉलीग्राफ टेस्ट

कोलकाता रेप और मर्डर केस की जांच कर रही सीबीआई ने सोमवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पतालके पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और पांच अन्य पर पॉलीग्राफ टेस्ट का दूसरा दौर शुरू कर दिया है. सीबीआई के एक अधिकारी के अनुसार, पहले पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान संदीप घोष ने सही जवाब नहीं दिए हैं. वो गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. इस वजह से उनका पॉलीग्राफ टेस्ट दोबारा करना पड़ रहा है. 

सीबीआई ने शनिवार को संदीप घोष सहित छह लोगों का लाई डिटेक्टर टेस्ट किया था. इसके बाद रविवार को मुख्य आरोपी संजय रॉय का प्रेसिडेंसी जेल में पॉलीग्राफ टेस्ट किया गया. इसके अलावा पूर्व प्रिंसपिल संदीप घोष और पूर्व चिकित्सा अधीक्षक संजय वशिष्ठ के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की भी जांच की जा रही है. इस सिलसिले में सीबीआई ने करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की है.

रविवार को सीबीआई ने संदीप घोष और संजय वशिष्ठ के घरों की तलाशी ली थी, जो कि देर रात चली थी. सोमवार सुबह कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीबीआई के दफ्तर में फाइलें और दस्तावेज पेश किए गए. एक अधिकारी ने बताया, “रविवार को तलाशी के बाद आरोपियों से कई सवाल किए गए हैं.” ये कार्रवाई आरजीकेएमसीएच के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की शिकायत के बाद की गई है.

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है. उनसे पिछले 10 दिनों में 100 घंटे से ज्यादा की पूछताछ की जा चुकी है. पिछले हफ्ते शनिवार को सीबीआई ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं का एक मामला दर्ज कर लिया. सीबीआई ने कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित एसआईटी से जांच अपने हाथ में ले ली. 

हाई कोर्ट ने लेडी डॉक्टर से बलात्कार के बाद हत्या के मामले की जांच पहले सीबीआई को सौंप दी थी. इसके बाद व्यापक और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संदीप घोष के वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी सीबीआई को सौंप दी थी. न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज ने कहा था, “यह न्यायालय निर्देश देता है कि जांच को सीबीआई को सौंप दिया जाए, क्योंकि इस मामले में गंभीर आरोप शामिल हैं.” 

कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की याचिका पर सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे, जिन्होंने अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया था और ईडी जांच की मांग की थी. अख्तर अली ने पिछले साल जुलाई में वेस्ट बंगाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन न्याय नहीं मिल पाया था.

अख्तर अली ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सरकारी धन के अनुचित उपयोग, इस्तेमाल किए गए खतरनाक जैव-चिकित्सा अपशिष्ट की बिक्री और मौद्रिक लाभ के लिए अधिकारियों के तबादले के दावों की पुष्टि करने के लिए दस्तावेजी सबूत दिए थे. इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ-साथ सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर ऐसी अवैध गतिविधियों के गंभीर प्रभाव का हवाला दिया गया था.

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