कबीरधाम शिक्षा विभाग घोटाला
कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में कथित 218 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। इस मामले में दो कर्मचारियों माया कसार और योगेंद्र कश्यप को निलंबित किया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान दोनों को जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
🔹 क्या है मामला?
- बीते तीन वर्षों (2022–2025) में कोषालय से निकाले गए करीब 218 करोड़ रुपये के लेन-देन में अनियमितताएं पाई गईं।
- ऑडिट रिपोर्ट में कैश बुक, वाउचर और बिल रजिस्टर गायब पाए गए।
- तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) संजय जायसवाल पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे।
🔹 पूर्व बीईओ का पक्ष
संजय जायसवाल ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है:
- उनके कार्यकाल में शिक्षकों का वेतन नियमित रूप से भुगतान किया गया।
- सभी वित्तीय दस्तावेज 11 दिसंबर 2025 को वर्तमान बीईओ को सौंप दिए गए थे।
- उनके पास हर लेन-देन का साक्ष्य मौजूद है।
- कार्यकाल अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 तक रहा।
🔹 लापरवाही किस कारण हुई?
पूर्व बीईओ ने बताया कि कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप को मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे, लेकिन:
- उन्होंने दस्तावेजों का संधारण ठीक से नहीं किया।
- कई वित्तीय अभिलेख अधूरे रह गए।
- नोटिस जारी करने के बावजूद उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
🔹 प्रशासनिक कार्रवाई
- माया कसार और योगेंद्र कश्यप को निलंबित किया गया।
- निलंबन के दौरान दोनों को जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
- जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एफ.आर. वर्मा ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कुछ कमियां पाई गईं और जांच जारी है।
🔹 आगे की संभावनाएं
इस मामले से शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर सवाल उठे हैं। अब आगे की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि:
- वास्तव में कोई गबन हुआ है या नहीं।
- कौन-कौन कर्मचारी दोषी हैं।
- विभागीय प्रक्रियाओं में सुधार की क्या आवश्यकता है।
इस वित्तीय अनियमितता मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा को भी जन्म दिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि आगामी रिपोर्ट से सभी सवालों का साफ जवाब मिलेगा।