स्कूलों को मिलेगी नई पहचान: छत्तीसगढ़ की 62 शालाओं के लिए 7.22 करोड़ की मंजूरी, दूरस्थ इलाकों में बदलेगा शिक्षा का स्वरूप


छत्तीसगढ़ स्कूल भवन निर्माण


📝 विशेष समाचार (400+ शब्द)

रायपुर | शिक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रदेश की 62 शालाओं में नवीन भवन निर्माण के लिए 7 करोड़ 22 लाख 56 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस फैसले से विशेष रूप से दूरस्थ और अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।


📊 कैसे बंटी राशि?

स्वीकृत राशि का वितरण इस प्रकार किया गया है:

  • 🏫 30 पूर्व माध्यमिक शालाएं
    • कुल राशि: 3.55 करोड़ रुपये
    • प्रति शाला: 11.84 लाख रुपये
  • 🏫 32 प्राथमिक शालाएं
    • कुल राशि: 3.67 करोड़ रुपये
    • प्रति शाला: 11.48 लाख रुपये

📍 किन जिलों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ?

इस योजना के अंतर्गत जशपुर, कोण्डागांव, बीजापुर, बस्तर, कांकेर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कोरबा, सूरजपुर, सरगुजा, गरियाबंद, बलरामपुर, रायगढ़ और मनेन्द्रगढ़-भरतपुर जैसे जिलों की शालाएं शामिल हैं।

🏫 प्रमुख पूर्व माध्यमिक शालाएं:

  • जशपुर: मनोरा, कुनकुरी, पत्थलगांव, कांसाबेल
  • कोण्डागांव: कोण्डागांव, माकड़ी, केशकाल
  • बीजापुर: भोपालपटनम, भैरमगढ़
  • बस्तर: बस्तानार, बकावंड
  • कांकेर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कोरबा, सूरजपुर, सरगुजा

🏫 प्रमुख प्राथमिक शालाएं:

  • जशपुर जिले के मनोरा, बगीचा, दुलदुला, कुनकुरी, पत्थलगांव
  • कोण्डागांव, कांकेर, सुकमा, बीजापुर, बस्तर
  • गरियाबंद, सूरजपुर, कोरबा, बलरामपुर, रायगढ़

इन क्षेत्रों में लंबे समय से स्कूल भवनों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।


🧱 निर्माण से क्या बदलेगा?

नवीन स्कूल भवन निर्माण से:

  • बच्चों को
    • सुरक्षित और स्थायी शैक्षणिक वातावरण मिलेगा
  • शिक्षकों को
    • बेहतर कार्यस्थल उपलब्ध होगा
  • अभिभावकों का
    • सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़ेगा
  • ड्रॉपआउट दर में
    • कमी आने की संभावना बनेगी

विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में यह पहल शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाएगी।


📝 आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि:

  • भूमि आबंटन के बाद
    • निविदा (टेंडर) प्रक्रिया शुरू की जाएगी
  • सभी निर्माण कार्यों का
    • व्यय विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा
  • निर्माण की
    • नियमित निगरानी की जाएगी

इससे पारदर्शिता और समयबद्ध कार्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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