सेबी की चेयरपर्सन माधबी बुच को बड़ी राहत… नहीं मिला कोई सबूत, लगे थे ये 3 गंभीर आरोप!

SEBI चेयरपर्सन माधबी बुच को बड़ी राहत मिली है. पिछले संसद सत्र के दौरान इनका नाम काफी चर्चा में आया था. कांग्रेस ने उन पर, उनके परिवार पर और भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि बड़े पैमाने पर भ्रष्‍टाचार हुआ है. साथ ही आरोप था कि सेबी चेयरपर्सन माधबी बुच (SEBI Chairperson Madhabi Buch) ने अपने पद का गलत इस्‍तेमाल कर रही हैं. हालांकि अब जांच पूरी हो चुकी है और इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं. 

आरोपों की चर्चा के बीच सरकार ने जांच शुरू कराई थी. एजेंसियों और वित्त मंत्रालय दोनों की ओर से जांच किया गया. इसमें माधबी बुच और उनके परिवार को बड़ी राहत दी गई है. इंडिया टुडे को सूत्रों ने बताया है कि जांच पूरी हो गई है और कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है. वे अभी SEBI चेयरपर्सन के पद पर बनी रहेंगी. 

  • सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने REIT को आगे बढ़ाया और इससे ब्लैकस्टोन को फायदा हुआ और बदले में उनके पति को भी फायदा हुआ क्योंकि वे ब्लैकस्टोन से जुड़े हुए हैं. 
  • कांग्रेस द्वारा माधबी बुच के खिलाफ उठाए गए मुख्य बिंदुओं में से एक यह था कि ब्लैकस्टोन को लाभ पहुंचाने के इरादे से REIT के लिए उनका जोर लगाया गया था, क्योंकि उनके पति ब्लैकस्टोन से जुड़े हुए हैं, विपक्ष ने भी उन पर उंगली उठाई और कहा कि वह SEBI अध्यक्ष के रूप में अपने पद का दुरुपयोग कर रही हैं. 
  • REIT का विचार सबसे पहले 2007 (UPA काल) में सामने आया था, कई सालों के बाद 2016 में SEBI ने निर्देश जारी किए, माधबी बुच 1 मार्च, 2022 को अजय त्यागी से पदभार संभालने के बाद SEBI की अध्यक्ष बनीं. 
  • SEBI के कामकाज में व्यापक बदलाव लाने का श्रेय उन्हें दिया जाता है और इन बदलावों ने ब्लैकस्टोन ही नहीं, बल्कि भारत में काम करने वाली कई वैश्विक कंपनियों को प्रभावित किया है. सरकारी सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया है कि ये आरोप निराधार हैं, उनके नाम पर सिर्फ राजनीति हो रही है. 

सेबी चेयरपर्सन पर दूसरा गंभरी आरोप लगा था कि उन्‍होंने अपने पिछले कार्यकाल से मिले पैसे का खुलासा नहीं किया, ICICI में अपने पिछले कार्यकाल से उन्हें जो पैसा मिला, उसका खुलासा नहीं किया गया. सरकार ने इन आरोपों की जांच की है और कोई भी लेनदेन अवैध नहीं मिला, उन्होंने अपना सारा बकाया चुका दिया है. 

ICICI बैंक ने स्पष्ट किया कि अक्टूबर 2013 में रिटायरमेंट के बाद उन्हें कोई वेतन या ESOP नहीं दिया गया, उन्हें केवल रिटायरमेंट प्रॉफिट दिया गया, जैसा कि उस पद पर अन्य सभी को दिया जाता है. बुच ने प्राइवेट सेक्‍टर के कर्जदाता के साथ 12 सालों तक काम किया और बाद में 2011 में समूह छोड़ने से पहले 2 वर्षों तक ICICI सिक्योरिटीज के CEO के रूप में कार्य किया. सिर्फ बुच को ही ICICI से रिटायर्ड होने के बाद राशि का भुगतान नहीं किया गया, बल्कि सभी शीर्ष बैंकों के शीर्ष प्रबंधकों को सेवानिवृत्ति लाभ दिया जाता है. यह सिर्फ एक व्यक्ति को कुछ गलत दिए जाने का मामला नहीं था.

सेबी में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा वित्त मंत्रालय को भेजे गए पत्रों ने बुच के लिए एक और मोर्चा खोला था. इस कारण न केवल बाजार नियामक के भीतर, बल्कि राजनीतिक महकमे में रोष पैदा कर दिया था. वित्त मंत्रालय से कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि इनके लीडरशिप में वर्क कल्‍चर बेकार है. सरकार ने इस पर गौर किया और कर्मचारियों से बात की. कर्मचारियों का आरोप था कि वे उनपर चिल्‍लाती हैं. 

सरकार का मानना ​​है कि सेबी की अध्यक्ष के रूप में माधबी पुरी बुच ने सिस्टम को साफ करने के लिए काफी प्रयास किए हैं और कई लोग इस सिस्टम को साफ करने से खुश नहीं हैं. सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि माधबी पुरी बुच अपना कार्यकाल पूरा करेंगी जो 28 फरवरी, 2025 को समाप्त होगा. 
 

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