दिल्ली के हॉस्पिटल में महिला कर्मियों को दी जा रही है सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग, कोलकाता कांड के बाद बढ़ी सतर्कता

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हुए बलात्कार और हत्या के मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया. इस घटना के बाद देशभर में चिकित्सा कर्मियों, विशेषकर महिला कर्मियों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है. हालांकि, इसे लेकर देशभर में हुई हड़ताल समाप्त हो चुकी है और डॉ अपनी ड्यूटी पर लौट आए हैं. लेकिन इस भयावह घटना के बाद उनके मन में असुरक्षा की भावना अभी भी बनी हुई है.

सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियां ​​मेडिकल प्रोफेशनल्स को उनकी सुरक्षा का भरोसा दिला रही हैं. हालांकि, उनमें से कुछ अपनी लड़ाई खुद लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. देश में पहली बार महिला मेडिकल स्टाफ को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे खतरे से निपटने के तरीके सीख सकें.

दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग ने दिल्ली पुलिस के परिवर्तन सेल के साथ मिलकर सात दिवसीय सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम की शुरुआत की है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य अस्पताल की महिला चिकित्सा कर्मियों को आत्मरक्षा की आवश्यक तकनीकों से लैस करना है. इस प्रशिक्षण में 600 से अधिक महिला चिकित्सा कर्मियों को आत्मरक्षा के विभिन्न तरीकों जैसे पंच, कोहनी का वार, ब्लॉकिंग, आंखों पर हमला, और बाल व हाथ की पकड़ से छुटकारा पाने के तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. 

इसके साथ ही ट्रेनिंग के दौरान उन्हें रोजमर्रा की चीजों का हथियार के रूप में प्रभावी उपयोग करने के तरीकों के बारे में भी सिखाया जाएगा. नॉन-मेडिकल महिला कर्मी भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा हैं. वे इसे लेकर काफी उत्साहित नजर आ रही हैं. 

फोर्टिस अस्पताल की डॉ. बरखा यादव का कहना है कि वह अस्पताल और काम से घर आने-जाने के दौरान खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, क्योंकि अस्पताल ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. लेकिन आरजी कर अस्पताल की घटना के बाद उनके माता-पिता चिंतित रहते हैं और उनसे लाइव लोकेशन साझा करने को कहते हैं.

नर्सिंग स्टाफ ममता भाटिया कहती हैं कि अब उन्हें आत्मविश्वास है और वह अपनी बेटियों को भी आत्मरक्षा के कौशल सिखाएंगी. नर्सिंग सहित अन्य चिकित्सा स्टाफ इस सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग की पहल में हिस्सा ले रहे हैं. दिल्ली पुलिस की कांस्टेबल पूनम सभी को पंच मारने और किसी भी स्थिति में खतरे से निपटने के तरीके सिखा रही हैं. पूनम का कहना है कि कुछ बुनियादी तकनीकें और पंच हैं जो महिलाओं को किसी भी खतरे को न्यूट्रलाइज करने के लिए सीखनी चाहिए.

आज के समय में हर लड़की और महिला के लिए आत्मरक्षा की टेक्नीक सीखना जरूरी है. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला स्टाफ को आत्मरक्षा के कौशल से लैस करेगा, जिससे वे खुद की रक्षा करने में सक्षम और आत्मविश्वासी बन सकेंगी. फोर्टिस अस्पताल की प्रशासनिक कर्मचारी सुभद्रा का कहना है कि हमने अपनी महिला स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की है. लेकिन, यह समय भी है कि वे सशक्तिकरण के लिए कौशल सीखें और इसलिए हमने यह पहल की. 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसने बुधवार को दिल्ली में अपनी पहली बैठक की. यह टास्क फोर्स चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा और उनके कामकाज की परिस्थितियों से संबंधित सिफारिशें करेगी. इस बैठक में कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष, सर्जन वाइस एडमिरल आर. सरीन, एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास और एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. पद्मा श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया.

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