कोरोना ने दुनिया को बड़ा दर्द दिया, लेकिन थोड़ी सीख भी दी। इस बीमारी के दौरान कुछ विकसित देशों ने हवा में वायरस का पता लगाने वाले सेंसर विकसित किए। हालांकि किसी खतरनाक वायरस का पता लगाने और उसका अलर्ट देने के लिए उच्च क्षमता वाले सेंसर विकसित किए जाने अभी बाकी हैं।
कुछ देशों में हाई क्वालिटी के वायरस सेंसर तैयार किए जा रहे हैं। इनसे हवा में किसी भी तरह का खतरनाक वायरस आते ही तत्काल पता चल जाएगा। काफी हद तक वैज्ञानिक इसमें सफलता पा चुके हैं। ऐसा होने पर बीमारी से लोगों को बचाने में यह तकनीक काम आएगी।
अमेरिका के मियामी विवि के वैज्ञानिक डॉ. प्रतिम विश्वास ने दून विवि में चल रहे राष्ट्रीय एयरोसोल कांफ्रेंस में इस तकनीक का ब्योरा पेश किया। उन्होंने दावा किया कि हम प्रदूषण (कण और वायरस) के कारकों की सही पहचान करने में लगभग सफल हो चुके हैं।
अब इन्हें स्रोत पर ही खत्म करने की तकनीक पर काम हो रहा है। दुनिया के कई देशों को इसमें शुरुआती सफलता भी मिली है। यही वजह है कि एयरोसोल साइंस यानी हवा में पाए जाने वाले कण और वायरसों की पहचान में इस्तेमाल होने वाली तकनीक भी तेजी से बढ़ रही है।
हवा में धूल मिट्टी के अलावा कार्बन, सल्फर और अन्य तरह के खतरनाक कण भी हैं। इनकी मानिटरिंग के लिए तो हमारे पास कई उपकरण हैं। इनसे भी खतरनाक हवा में फैलने वाले विभिन्न तरह के वायरस की मानिटरिंग और तत्काल पहचान के लिए हमारे पास अभी हाई क्वालिटी के सेंसर नहीं हैं। इनको अब विकसित किया जा रहा है।
अमेरिका और रूस जैसे कुछ देशों में कोरोना के समय विकसित किए गए वायरल सेंसरों को और उन्नत करने पर काम चल रहा है, जो हवा में किसी भी तरह का वायरस आने पर तत्काल अलर्ट कर देंगे।
दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय श्रीधर कहते हैं कि देश में अभी वायरल सेंसर जैसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो रहा। कुछ देशों में ये इस्तेमाल होने लगे हैं। हमारे देश में भी इनको विकसित करने को लेकर कुछ बड़े संस्थान काम कर रहे हैं। आने वाले समय में हम भी इनका इस्तेमाल कर हवा में आने वाले विभिन्न वायरसों का तत्काल पता लगा लेंगे।
वायरस जनित रोगों से मिलेगी राहत
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सेंसरों के इस्तेमाल से कोरोना या इस तरह की वायरस से फैलने वाली बीमारियों से बड़ा बचाव हो सकेगा। ये हवा में इस तरह के वायरसों को तत्काल डिटेक्ट कर लेंगे। इसमें बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी। कोई नया वायरस आने पर उसकी पहचान और रोकने के उपाय में भी ये सेंसर मददगार होंगे।