बैतूल स्कूल तोड़फोड़ मामला
बैतूल स्कूल तोड़फोड़ मामला: जब शिक्षा पर चला बुलडोजर
मध्य प्रदेश सरकार जहां “सब पढ़ें, सब बढ़ें” और सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से शिक्षा को हर गांव तक पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं बैतूल जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भैंसदेही तहसील के धाबा गांव में प्रशासन द्वारा एक निजी स्कूल भवन को तोड़ दिए जाने से पूरे गांव में आक्रोश और निराशा फैल गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक इमारत को गिराने तक सीमित नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला है।
क्यों बनाया गया था स्कूल?
धाबा गांव के निवासी अब्दुल नईम ने गांव की शिक्षा समस्या को देखते हुए:
- करीब 20 लाख रुपये की लागत से
- “एस.के. पब्लिक स्कूल” का निर्माण कराया
- नर्सरी से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई शुरू करने की योजना बनाई
गांव की आबादी लगभग 2000 है और इससे पहले बच्चों को पढ़ाई के लिए 5 किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ता था। इस स्कूल से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली थी।
अफवाह से कार्रवाई तक: पूरा घटनाक्रम
ग्रामीणों के अनुसार:
- स्कूल बनते ही पंचायत के कुछ लोगों में नाराजगी शुरू हुई
- यह अफवाह फैलाई गई कि स्कूल अवैध है
- प्रशासनिक जांच में कोई आपत्ति नहीं पाई गई
- केवल पंचायत से एनओसी लेने की सलाह दी गई
इसके बावजूद घटनाएं तेजी से बदलीं।
नोटिस, एनओसी और फिर भी बुलडोजर
घटना से जुड़े अहम बिंदु:
- 11 जनवरी को पंचायत ने अचानक स्कूल तोड़ने का नोटिस जारी किया
- नईम ने बताया कि:
- भूमि के सभी दस्तावेज पूरे हैं
- 30 दिसंबर को स्कूल शिक्षा विभाग में अनुमति के लिए आवेदन किया जा चुका है
- ग्रामीणों के विरोध के बाद पंचायत ने एनओसी भी जारी कर दी
- इसके बावजूद तोड़फोड़ का आदेश वापस नहीं लिया गया
नईम का आरोप है कि एसडीएम ने कहा—
“ऊपर से बहुत प्रेशर है, स्कूल तो तोड़ना पड़ेगा।”
कलेक्टर से मिलने निकले, पीछे से टूट गया स्कूल
मंगलवार को:
- सैकड़ों ग्रामीण नईम के साथ
- बैतूल कलेक्टर कार्यालय ज्ञापन देने निकले
- रास्ते में पुलिस ने रोक दिया
- बाद में जनता दरबार में कलेक्टर ने जांच का आश्वासन दिया
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इसी दौरान, जांच की बात चल रही थी और दूसरी ओर एसडीएम के आदेश पर स्कूल भवन पर बुलडोजर चला दिया गया।
ग्रामीणों का गुस्सा और सवाल
इस घटना के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है:
- यदि कोई कानूनी कमी थी, तो जुर्माना लेकर सुधार कराया जा सकता था
- स्कूल तोड़ने से सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी
- यह कार्रवाई सर्व शिक्षा अभियान की भावना के खिलाफ है
ग्रामीणों ने मांग की है:
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच
- दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई
- गांव के बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था