किसी भी व्यक्ति की अपनी अलग पहचान होती जो उन्हे सबके बीच स्वीकार्यता दिलाती है,यदि बात राज्य के मुखिया विष्णुदेव साय की करें जो कि आज अपना 62 वां जन्मदिन मना रहे हैं। पंच से लेकर मुख्यमंत्री के पद तक वे पहुंच गए हैं लेकिन उनकी सादगी सहजता व संवाद ने आज उन्हे प्रदेश का सर्वाधिक लोकप्रिय नेतृत्व बना दिया है। शायद ही कोई व्यक्ति हो जो उनकी कार्यशैली या स्वभाव से नाराज हुआ हो। जमीनी स्तर के आदिवासी नेता आक्रामक व तेज तर्रार राजनीति से हमेशा दूर रहे। जब डा.रमनसिंह के पन्द्रह साल के कार्यकाल के बाद भाजपा ने सत्ता में वापसी की तब किसी को अंदाजा नहीं था कि एक सौम्य चेहरा को नेतृत्व संगठन की ओर से सौंपा जा सकता है और सबको साधने में वे सफल रहेंगे। आखिरकार विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया गया और आज दो साल से भी अधिक के कार्यकाल में बेहतर नेतृत्व प्रदान कर संगठन के विश्वास पर वे खरा उतरे। राज्य उनके नेतृत्व में लगातार सफलता के नए सोपान तय कर रहा है। संगठनात्मक अनुशासन, आदिवासी समाज में पकड़ और विवादों से दूर रहने की छवि ने साय को भाजपा के अंदर भरोसेमंद नेता बनाया। शांत स्वभाव और प्रशासनिक संतुलन के कारण वे संगठन और सरकार दोनों में स्वीकार्य चेहरा बने। जैसे कि प्रदेश के लोग जानते हैं विष्णु देव साय का जन्म 21 फरवरी 1964 को छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) के जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम बगिया में हुआ। पिता राम प्रसाद साय किसान थे और माता जसमनी देवी गृहिणी। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े साय ने कुनकुरी से हायर सेकेंडरी तक शिक्षा प्राप्त की। 1991 में उनका विवाह कौशल्या देवी साय से हुआ। पारिवारिक रूप से भी उनका राजनीति से जुड़ाव रहा। साय ने 1989 में बगिया ग्राम पंचायत में पंच के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1990 में वे निर्विरोध सरपंच चुने गएऔर यही वर्ष उनके लिए बड़ा राजनीतिक मोड़ साबित हुआ। उसी साल अविभाजित मध्यप्रदेश की तपकरा विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर वे विधायक बने। 1990 से 1998 तक दो लगातार कार्यकालों में विधायक रहते हुए उन्होंने आदिवासी क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और संगठन में भरोसेमंद नेता के रूप में पहचान बनाई। 1999 में साय पहली बार रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने लगातार चार बार, 1999, 2004, 2009 और 2014, लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। संसदीय कार्यकाल के दौरान वे कई महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे, जिनमें खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन और वाणिज्य समितियां शामिल हैं।2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें खान और इस्पात मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया। 2014 से 2019 के बीच उन्होंने इस्पात, खान, श्रम एवं रोजगार जैसे मंत्रालयों में जिम्मेदारियां संभालीं। 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने साय को प्रमुख जिम्मेदारियां दीं। वे घोषणा पत्र समिति से लेकर बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क अभियान के प्रमुख चेहरों में रहे। आदिवासी समाज से आने वाले नेता के रूप में उन्हें रणनीतिक रूप से आगे बढ़ाया गया। 3 दिसंबर 2023 को वे विधायक चुने गए और 10 दिसंबर 2023 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर उन्होंने राज्य का नेतृत्व संभाला। आज सभी को साथ लेकर वे एक कुशल नेतृत्वकर्ता के रुप में अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं। रायपुर से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेताओं ने भी उनकी कार्यप्रणाली को सराहा है। केन्द्र सरकार का सहयोग लेकर छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के नासूर को समाप्त करना उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। केन्द्र व राज्य सरकार की साझा नीतियों व योजनाओं को वे प्रदेश की जनता के बीच अंतिम छोर तक पहुंचा रहे हैं।