रायगढ़। सुस्त मांग और चाइनीज स्टील के आयात में बढ़ोतरी के चलते स्टील की कीमतें तेजी से गिरी हैं। 2022 तक स्टील 80 हजार रुपए प्रति टन तक पहुंच गया था जो अब करीब 55 हजार पर आ चुका है। यह तो ब्रांडेड कंपनियों का हाल है। लोकल कंपनियों की स्थिति ज्यादा खराब है। देश में स्टील की कीमतों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। इसका संबंध विदेशी आयात से है। एक समय था जब ब्रांडेड सरिया की कीमत करीब 80-85 हजार रुपए प्रति टन तक पहुंच गई थी। ज्यादा गिरावट का किसी को अनुमान नहीं था। 2023 के बाद से स्थिति बदली और स्टील प्राइस कम हो गईं। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि हुई तो स्टील की कीमतें भी बढऩे का अनुमान लगाया गया।
आयरन ओर और कोयले की कीमतें भी डाउन हुई हैं। इसका बुरा असर सरिया की कीमतों में दिख रहा है। रायगढ़ में ब्रांडेड सरिया करीब 55-58 हजार रुपए प्रति टन के आसपास है। वहीं लोकल कंपनियों का सरिया करीब 40-42 हजार पर पहुंच गया है। इस वजह से उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। मांग में कमी के कारण भी ऐसा होने का अनुमान है। इसकी एक वजह आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी भी है। चीन और वियतनाम जैसे देशों से सस्ते स्टील के आयात में वृद्धि हुई है। जिससे घरेलू कीमतों में गिरावट आई है।
घरेलू मांग में कमी
स्टील की कीमतों में गिरावट मुख्य रूप से कमजोर मांग, सस्ते आयात और निर्यात में कमी के कारण हो रही है। घरेलू मांग में नरमी और निर्माण गतिविधियों पर मानसून का असर भी कीमतों पर दबाव डाल रहा है। सस्ते स्टील की अधिकता और घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति में असंतुलन भी कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण हैं। उद्योगपतियों को उम्मीद है कि जल्द ही मांग बढ़ेगी और स्टील सेक्टर की हालत सुधरेगी।