कद में छोटे लेकिन अपने कदमों यह पूरी दुनिया को माप रहे हैं। हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे लोगों की कहानी जिनका कद छोटा रह जाने से समाज में उन्हें वह मुकाम नहीं मिला लेकिन अपनी मेहनत से इन लोगों को अपना और देश का नाम रोशन किया। इन लोगों को आम बोलचाल में बौना कह दिया जाता है लेकिन इनकी सफलता की ऊंचाई बहुत ज्यादा है। यहां हम चर्चा कर रहे हैं बिहार के मुजफ्फरपुर के अभ्युदय शरण की ऊंचाई तीन फीट है लेकिन उनके काम बड़े बड़े हैं। अपने हौसले से अभ्युदय ने दिव्यांगता को बौना साबित कर दिया है।
अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट हैं। पिछले वर्ष अभ्युदय ने जर्मनी में हुए बौनों की खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। अभ्युदय को मतदाता जागरूकता के लिए चुनाव आयोग ने स्वीप भी बनाया था। अभ्युदय लगातार दिव्यांगों के हक की लड़ाई के लिए आवाज उठा रहे हैं। इतना ही नहीं अभ्युदय शरण सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर हमेशा एक्टिव रहते हैं। प्रशासन की गतिविधियों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन के संवाद प्रेषण में वे सहयोग करते हैं।
दिव्यांगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं पर अभ्युदय ने अपनी राय जाहिर की। उन्होंने बताया कि सरकार से जितनी मदद हम दिव्यांगों के लिए होनी चाहिए उतनी नहीं मिल पाती है। हमलोगों को हाल में सिर्फ साइकिल दी गई है। अभ्युदय की तरह औरंगाबाद के संतोष कुमार भी पिछले वर्ष जर्मनी में हुए खेल प्रतियोगिता में शामिल हुए थे और देश के लिए कांस्य पदक जीत कर लाये थे। बिहार में 15 ऐसे कम कद के दिव्यांग हैं जो खेल और दूसरी विधाओं में देश में नाम रोशन कर रहे हैं।