खुद को 1979 बैच का रिटायर्ड आईपीएस अफसर बताकर देशभर के अफसरों पर रौब झाड़ने वाले अनिल कटियाल और उसके साथी विनोद कपूर को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की जांच में अनिल कटियाल अंतरराष्ट्रीय दलाल निकला। पुलिस ने उसकी वॉट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्डिंग साझा कर प्रेसवार्ता में कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
एडिशनल सीपी दिनेश कुमार पी. ने बताया कि दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-एक निवासी 69 वर्षीय फर्जी आईपीएस अधिकारी अनिल कटियाल और थाना डीएलएफ फेज-थ्री सिरीस रोड गुरुग्राम निवासी विनोद कपूर को गिरफ्तार किया गया है। अनिल के मोबाइल से तमाम ऐसे सुबूत मिले हैं, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा रही दलाली की पोल खुली है। वह करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोप में दो बेटों के साथ दुबई की जेल में बंद राज साहनी उर्फ बलविंदर साहनी उर्फ अबू साबा को भारत लाने के लिए दलाली में जुटा था। इसके लिए वह ई-मेल के जरिये न सिर्फ दुबई में भारत के राजदूत के संपर्क में था, बल्कि उसने विदेश मंत्री को कॉलेज का सहपाठी बताकर मिलने का समय भी मांगा था। अबू साबा दुबई का अरबपति रियल एस्टेट कारोबारी और कांग्रेस नेता शशि थरूर की दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर का चचेरा भाई बताया जाता है।
आधिकारियों से तमाम काम निकलवाए : एडिशनल सीपी ने बताया कि अनिल कटियाल की वॉट्सऐप चैट से पता चला है कि उसने खुद को अधिकारी बताकर दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों से कई काम निकलवाए। दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारी से महरौली स्थित बार का न सिर्फ लाइसेंस बहाल कराया, बल्कि उसकी सील भी खुलवाई। इसके अलावा आरटीओ और आबकारी विभाग के अधिकारियों पर भी दबाव बनाकर अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त किया। अनिल ने नोएडा पुलिस के अधिकारियों से भी जमीन से जुड़ा काम कराया।
सीपी संग फोटो खिंचवाई तो रडार पर आया आरोपी
अनिल खुद को मणिपुर कैडर का रिटायर्ड अधिकारी बताते हुए डीसीपी ट्रांस हिंडन से मिला और विनोद कपूर के खिलाफ इंदिरापुरम थाने में दर्ज केस की पैरवी की। उसने डीसीपी के पीआरओ से फोन पर हुई बात में खुद को अधिकारी बताया था। डीसीपी के अलावा वह पुलिस कमिश्नर से भी मिला। उसने सीपी के साथ फोटो खिंचवाया तो वह रडार पर आ गया। जांच के बाद डीसीपी ट्रांस हिंडन के पीआरओ नीरज राठौर ने अनिल और उसके साथी विनोद कपूर के खिलाफ साहिबाबाद थाने में केस दर्ज कराया था।
आईआरएस अधिकारी थे आरोपी अनिल के पिता
पुलिस के अनुसार, अनिल के पिता स्वर्गीय चेतराम कटियाल आईआरएस अधिकारी थे। अनिल की प्राथमिक पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से हुई थी। उसने वर्ष 1978 में सेंट स्टीफंस कॉलेज से एमएससी की डिग्री ली और वर्ष 1979 में यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन पास नहीं हुआ। इसके बाद येल यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने यूएसए चला गया। 1980 में पढ़ाई छोड़कर लौट आया। वर्ष 1980 से 2000 तक बड़ी कंपनी में मैनेजर रहा। वर्ष 2000 से 2005 तक दूसरी कंपनी में चीफ जनरल मैनेजर था। वर्ष 2005 से 2015 तक मोबाइल नेटवर्क कंपनी में काम किया। यहां से वाइस प्रेसिडेंट कॉरपोरेट अफेयर्स के पद से रिटायर हुआ था। अनिल का एक बेटा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के इन्वेस्ट इंडिया में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट है, जबकि दूसरा बेटा जर्मनी में कार्यरत है।
एयरपोर्ट बनाने का कार्य करता है विनोद कपूर
अनिल कटियाल जिस विनोद कपूर की पैरवी कर रहा था, वह एयरपोर्ट बनाने का काम करता है। उसने वर्ष 1976 में भारत कंस्ट्रक्शन राजस्थान में काम करने की बात कही। दावा किया कि वर्ष 1988 में दिल्ली कंस्ट्रक्शन नाम से कंपनी बनाकर दिल्ली, पालम, सरसावा एयरपोर्ट बनाए। वहीं, ग्वालियर एयरबेस जैसे महत्वपूर्ण जगहों पर हैंगर, रनवे, कंपाउंड वॉल आदि का निर्माण कराया। पुलिस के मुताबिक, अनिल की विनोद से करीब 15 दिन पहले मुलाकात हुई थी। दोनों की मुलाकात दुबई के ट्रेडिंग कारोबारी गुरविंदर सिंह ने कराई थी।
अधिकारी रह चुके भाई के नाम का लाभ लिया
अधिकारियों के मुताबिक, अनिल के एक चचेरे भाई आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उनके नाम का लाभ उठाकर अनिल ने तमाम अधिकारियों से संपर्क बनाए। इतना ही नहीं, वह विभिन्न राज्यों और केंद्र में तैनात डीजी स्तर के अधिकारियों को अपना दोस्त बताकर लोगों को जाल में फंसाता था। वह महीने में एक बार पार्टी का आयोजन कर अधिकारियों को दावत देता था।
अतीक से खौफ नहीं खाया, केस दर्ज होने पर डर गया
पीआरओ से बातचीत में अनिल ने माफिया रहे अतीक अहमद के खिलाफ यूपी पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करने और उसकी हत्या से 15 दिन पहले बनारस कोर्ट में उसके खिलाफ गवाही देने का दावा किया। उसने कहा कि इस दौरान एडीजी कानून-व्यवस्था ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई थी। वहीं, पीआरओ ने जब केस दर्ज होने की बात बताई तो वह डर गया। आईडी मांगी तो दस्तावेज चोरी होने की बात कही।