वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर सख्त रोक

रायपुर, वन क्षेत्रों और वन्यजीव अभयारण्यों में वन्यप्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग ने आवारा कुत्तों के प्रवेश पर सख्ती बढ़ा दी है। यह कदम हाल ही में अंबिकापुर स्थित संजय वाटिका में हुई उस दुखद घटना के बाद उठाया गया है, जिसमें आवारा कुत्तों ने हिरणों और अन्य शाकाहारी वन्यप्राणियों की जान ले ली थी। इस घटना के बाद, वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए एक ठोस योजना तैयार की है।

आवारा कुत्तों द्वारा हमले की घटना

यह घटना 20-21 मार्च की रात अंबिकापुर स्थित संजय वाटिका में हुई थी, जहां आवारा कुत्तों ने बाड़े में घुसकर 15 वन्यप्राणियों को मार डाला। यह घटना वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई, जिसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए हैं।

मुख्य निर्देश और उपाय

  1. SOP का कड़ाई से पालन
    राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन किया जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अगले दो सप्ताह में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि वे इस दिशा में और अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकें।
  2. पालतू कुत्तों की पहचान
    वन क्षेत्रों के पास स्थित गांवों में पालतू कुत्तों को विशिष्ट रंग के पट्टे (कॉलर) पहनाए जाएंगे। इससे वन क्षेत्र में पाए जाने वाले कुत्तों की पहचान आसानी से की जा सकेगी, और यदि कोई कुत्ता बिना अनुमति के वन क्षेत्र में पाया गया, तो उसके मालिक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
  3. मानवीय तरीके से नियंत्रण
    आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके प्रबंधन के लिए “एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया” (AWBI) के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में पशु कल्याण के सभी मानकों का ध्यान रखा जाएगा, ताकि आवारा कुत्तों को बिना किसी हानि के नियंत्रित किया जा सके।
  4. जन जागरूकता अभियान
    वन क्षेत्रों के आसपास के गांवों में पोस्टर, बैनर और ग्राम सभाओं के माध्यम से जन जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसका उद्देश्य लोगों को वन्यप्राणियों की सुरक्षा, हमलों से बचाव और रैबीज जैसी बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करना है।

संभावित परिणाम और भविष्य की दिशा

प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने इस कदम को वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इस योजना का पालन करने से वन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित होगी और वन्यजीवों को हमलों से बचाया जा सकेगा। उन्होंने सभी वनमंडलाधिकारियों से आग्रह किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रामवार योजनाएं बनाकर इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।

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