छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने कोंडागांव प्रवास के दौरान अधिकारियों की अहम समीक्षा बैठक लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पूरक पोषण आहार योजना, मध्यान्ह भोजन योजना तथा आश्रम-छात्रावासों में बीपीएल दर पर खाद्यान्न वितरण की विस्तृत समीक्षा की गई।
फरवरी-मार्च के भंडारण पर फोकस
बैठक में जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों में फरवरी और मार्च माह के लिए खाद्यान्न भंडारण की स्थिति पर चर्चा हुई।
अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि:
- जिन दुकानों में फरवरी माह का खाद्यान्न शेष है, वहां 7 दिनों के भीतर भंडारण और वितरण पूरा किया जाए।
- सभी खाद्य निरीक्षक नियमित रूप से दुकानों का निरीक्षण करें।
- प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
- दुकानों की निगरानी समिति को सक्रिय किया जाए।
- समिति सदस्यों के मोबाइल नंबर दुकान में प्रदर्शित किए जाएं।
इन कदमों का उद्देश्य है कि आम नागरिकों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो।
मध्यान्ह भोजन और छात्रावास व्यवस्था पर सख्ती
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जहां रसोइयों की हड़ताल के कारण मध्यान्ह भोजन योजना प्रभावित हुई है, वहां इसे तत्काल पुनः प्रारंभ किया जाए।
अध्यक्ष ने विशेष रूप से कहा कि:
- सभी बालक छात्रावासों की साफ-सफाई की नियमित निगरानी हो।
- भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए।
- प्रति डाइट खाद्यान्न पात्रता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो।
आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग
आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए।
- बच्चों की उपस्थिति रिपोर्टिंग व्यवस्था त्रुटिरहित हो।
- फोर्टीफाइड चावल पकाने की सही विधि का प्रशिक्षण दिया जाए।
- फोर्टीफाइड चावल के लाभों की जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाई जाए।
छात्रावासों का निरीक्षण
आयोग की टीम ने:
- अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास, माकड़ी
- बालक छात्रावास, शामपुर
का निरीक्षण किया।
कन्या छात्रावास की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई, जबकि बालक छात्रावास शामपुर में दाल और सब्जी की गुणवत्ता सुधारने, साफ-सफाई बेहतर करने तथा खाद्य आयोग के कॉल सेंटर नंबर को प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए।
पारदर्शिता पर जोर
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि:
- शिकायत और सुझाव हेतु कॉल सेंटर नंबर स्थायी रूप से प्रदर्शित किया जाए।
- खाद्यान्न पात्रता और वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
- निरीक्षण और निगरानी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह बैठक दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग राज्य में खाद्य सुरक्षा योजनाओं को मजबूत और जवाबदेह बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
यदि इन निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ, तो न केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार होगा बल्कि छात्रावासों और विद्यालयों में बच्चों को बेहतर पोषण और सुरक्षित भोजन भी सुनिश्चित हो सकेगा।