शिमलाः हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले की मयाड़ घाटी में अचानक बाढ़ आने से जनजीवन पर असर पड़ा है। जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे मयाड घाटी के चांगुट नाला में अचानक बाढ़ आने से चांगुट से तिंगरेट तक रोड सड़क बंद हो गई है। जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
शिमला, कुल्लू और मंडी में बादल फटा
वहीं, मंडी जिले के राजबन गांव में शनिवार को बचाव दल के लोगों ने एक चट्टान के नीचे एक व्यक्ति को फंसा हुआ देखा, जिसके बाद वे विस्फोट कर इसे तोड़ने और पीड़ित को वहां से निकालने का प्रयास कर रहे हैं । इस मामले में पांच लोग अब भी लापता हैं। हिमाचल प्रदेश के तीन जिलों (शिमला, कुल्लू और मंडी) में बादल फटने के बाद लापता हुए करीब 45 लोगों का पता लगाने के लिए बचाव अभियान शनिवार को फिर से शुरू हो गया लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
अब तक 8 लोगों के मरने की सूचना
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि सेना, एनडीआरएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), एसडीआरएफ, सीआईएसएफ , पुलिस और होमगार्ड की टीम के कुल 410 बचावकर्मी ड्रोन की मदद से खोज अभियान में शामिल हैं। बुधवार रात कुल्लू के निरमंड, सैंज और मलाणा, मंडी के पधर और शिमला के रामपुर उपखंड में बादल फटने से आई बाढ़ में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है।
एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर करम सिंह ने कहा, “संयुक्त बचाव अभियान चल रहा है और लापता लोगों की तलाश के प्रयास जारी हैं। हम मलबे में दबे या फंसे हुए लोगों का पता लगाने के लिए विभिन्न उपकरणों और सेंसर का उपयोग कर रहे हैं।” करम की टीम अन्य लोगों के साथ शिमला और कुल्लू जिले की सीमा पर स्थित समेज गांव में लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। सरपारा गांव के प्रधान मोहन लाल कपटिया ने कहा, “हर गुजरते घंटे के साथ लोगों का जीवित बचाने की संभावना कम होती जा रही है, लेकिन हम बस यही उम्मीद करते हैं कि शव जल्द ही बरामद कर लिए जाएं, क्योंकि देर होने पर शव सड़ जाएंगे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाएगा।
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