पुलिस की नौकरी छोड़ टीचर बना, घर में इकलौता कमाने वाला था सुनील…कफन में लिपटकर रायबरेली पहुंचे चार शव तो फफक पड़े परिजन

अमेठी जिले के शिवरतनगंज इलाके में टीचर फैमिली की हत्या से परिजन गहरे सदमे में हैं. पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही चारों शव रायबरेली के गदागंज स्थित गांव पहुंचे वहां कोहराम मच गया. इस दौरान सैकड़ों ग्रामीणों के साथ पुलिस फोर्स, क्षेत्रीय विधायक, सपा और कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी भी रही. वहीं, मृतक के घरवालों ने भावुक होते हुए कैमरे के सामने आपबीती सुनाई. साथ ही इस हत्याकांड के दोषी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की.  

मृतक टीचर सुनील कुमार की बड़ी बहन सुनीता ने रोते हुए कहा कि ‘भाई ने तो पुलिस की नौकरी छोड़कर शिक्षक की जॉब चुनी थी. कल शाम घर पर फोन किया था, लेकिन लगा नहीं. इसपर बेटे ने मामा (सुनील) के नंबर पर कॉल किया तो वहां से पुलिस ने बताया सुनील को गोली लगी है, तब जाकर घटना की जानकारी हुई. ना जाने क्यों भाई को मार डाला’

 

वहीं, मृतका पूनम भारती (सुनील की पत्नी) की मां बिलख-बिलख कर आरोप लगाती हैं- “चंदन वर्मा (हत्या का आरोपी) लगातार बेटी को परेशान कर रहा था. 18 अगस्त को दर्ज कराए मुकदमे के बाद वह बेटी पूनम के साथ-साथ मां, बाप और सुनील को भी धमका रहा था. कहता था कि सुलह कर लो, नहीं तो मैं कुछ भी कर दूंगा. चंदन बेटी की गंदी फोटो भेजता था और ब्लैकमेल कर परेशान करता था.” 

 उधर, सुनील कुमार के पिता  रामगोपाल ने कहा कि हत्यारे का भी वही हश्र होना चाहिए जो मेरे परिवार का हुआ है. जिस तरह मेरा बेटा चला गया, उसी तरह उन्हें (हत्यारों को) भी जाना चाहिए. वह मेरे घर का इकलौता कमाने वाला था. फिलहाल, रामगोपाल की शिकायत पर पुलिस ने सुनील, पत्नी पूनम और उनकी दो बेटियों की हत्या के आरोप में रायबरेली निवासी चंदन वर्मा पर मुकदमा दर्ज कर लिया है. 

इस बीच मृतक के घर पहुंचे ऊंचाहार विधानसभा से विधायक और बीजेपी नेता मनोज पांडे ने कहा कि दुख की इस घड़ी में हम परिवार के साथ हैं. उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को दर्ज की गई एफआईआर में पुलिस ने लापरवाही बरती. अगर  समय पर कार्रवाई की गई होती तो शायद यह घटना नहीं होती. लेकिन अब इस हैवानियत भरी घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस के कई टीमें लगाई गई हैं. परिवार के साथ न्याय होगा, जो लोग भी राजनीति कर रहे हैं उनसे बस यही कहना है कि यह मौका राजनीति का नहीं है. बल्कि पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने का है.

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