प्रो. महमूदाबाद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को सहमत

नई दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित कथित सोशल मीडिया टिप्पणी के बाद हरियाणा पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को सहमति व्यक्त की।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के मामले का विशेष उल्लेख कर तत्काल सुनवाई की मांग पर कहा कि अदालत मामले को 20 या 21 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी।
पीठ के समक्ष श्री सिब्बल ने पीठ से गुहार लगाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को उनके ‘देशभक्तिपूर्ण बयानों’ के लिए गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा, “उन्हें देशभक्तिपूर्ण बयान के लिए गिरफ्तार किया गया है। कृपया मामले को सूचीबद्ध करें।”
अशोका विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख महमूदाबाद को हरियाणा पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। रविवार को दो अलग-अलग मामलों के मुकदमा दर्ज होने पर उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उनकी कथित टिप्पणियों के लिए भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का आरोप है ।
हरियाणा राज्य महिला आयोग ने भी प्रो. महमूदाबाद की टिप्पणियों की आलोचना की थी। आयोग ने कहा था टिप्पणियां भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों के प्रति अपमानजनक है और इसने सांप्रदायिक विद्वेष को भी बढ़ावा दिया है।
आयोग ने 02 मई को प्रो महमूदाबाद को सम्मन जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि उनकी टिप्पणियों से वर्दीधारी महिलाओं (जिनमें कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह भी शामिल हैं) के प्रति अपमान की चिंता पैदा हुई है, पेशेवर अधिकारियों के रूप में उनकी भूमिकाओं को कमतर आंका गया है, और भारत सरकार पर दुर्भावनापूर्ण इरादे का आरोप लगाते हुए बार-बार ‘नरसंहार’, ‘अमानवीयकरण’ और ‘पाखंड’ का संदर्भ देकर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
प्रो. महमूदाबाद ने अपने बचाव में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों को पूरी तरह गलत समझा गया है। आरोपी महमूदाबाद ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, “मैं कर्नल सोफिया कुरैशी की प्रशंसा करते हुए इतने सारे दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों को देखकर बहुत खुश हूं, लेकिन शायद वे उतनी ही जोर से यह भी मांग कर सकते हैं कि भीड़ द्वारा हत्या, मनमाने ढंग से बुलडोजर चलाने और भाजपा के नफरत फैलाने के शिकार अन्य लोगों को भारतीय नागरिक के रूप में संरक्षित किया जाए।”

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