सारंगढ़ तहसीलदार अनशन
🚨 थाने के सामने धरना, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से प्रशासन और पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। सारंगढ़ कोतवाली थाने के सामने एक तहसीलदार को आमरण अनशन पर बैठना पड़ा, तब जाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। मामला कलेक्टर के गनमैन द्वारा तहसीलदार के बेटे से कथित मारपीट से जुड़ा है।
यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब एक जिम्मेदार अधिकारी को न्याय के लिए धरने पर बैठना पड़े, तो आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी।
👤 कौन हैं तहसीलदार बंदेराम भगत?
- नाम: बंदेराम भगत
- वर्तमान पद: तहसीलदार, दीपका (कोरबा)
- पृष्ठभूमि: सेना से रिटायर्ड जवान
- प्रशासनिक सेवा में लंबे समय से कार्यरत
बंदेराम भगत का कहना है कि उन्होंने हमेशा कानून और व्यवस्था का सम्मान किया, लेकिन जब उनके बेटे के साथ अन्याय हुआ और पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो उन्हें थाने के सामने धरना देना पड़ा।
⚠️ क्या है पूरा मामला?
📅 घटना की तारीख: 20 जनवरी
- तहसीलदार का बेटा राहुल भगत स्कूटी से जा रहा था
- सड़क पर कुछ अवरोध के कारण कलेक्टर के गनमैन से बहस
- आरोप है कि मामूली नोंक-झोंक के बाद:
- गनमैन ने राहुल की जमकर पिटाई
- जमीन पर गिरे मोबाइल को उठाते समय दोबारा हमला
- जूते से राहुल के कान को कुचलने का प्रयास
घटना के बाद राहुल भगत ने सारंगढ़ कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी।
🏥 मेडिकल रिपोर्ट ने बढ़ाई गंभीरता
- राहुल भगत की सारंगढ़ में मेडिकल जांच
- हालत गंभीर होने पर रायगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर
- डॉक्टरों की पुष्टि:
- कान के पर्दे को नुकसान
- सुनने की क्षमता पर असर की आशंका
इसके बावजूद 48 घंटे तक FIR दर्ज नहीं हुई, जिससे परिवार और आहत हो गया।
❗ पुलिस पर गंभीर आरोप
तहसीलदार बंदेराम भगत का आरोप है कि:
- FIR दर्ज करने में जानबूझकर देरी
- एसपी से मिलने पर भी राहुल को दोषी ठहराया गया
- कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई
इसी पुलिस निष्क्रियता से आहत होकर उन्होंने कोतवाली थाने के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया।
🪧 अनशन से मचा प्रशासन में हड़कंप
जैसे ही तहसीलदार के धरने की खबर फैली:
- प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
- वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे
- तहसीलदार से बातचीत और समझाइश
⏱️ नतीजा:
- आनन–फानन में एफआईआर दर्ज
- FIR की कॉपी तहसीलदार को सौंपी गई
- इसके बाद अनशन समाप्त
🤔 बड़ा सवाल: कानून सबके लिए समान?
सारंगढ़ तहसीलदार अनशन का यह मामला कई सवाल छोड़ जाता है:
- क्या वर्दीधारी और प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई मुश्किल है?
- क्या बिना धरना-प्रदर्शन के न्याय संभव नहीं?
- आम आदमी को FIR के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ती होगी?
यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा और बहस का विषय बन चुका है। लोग पुलिस की भूमिका, निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।