250 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ को 2008 में किया गया था ट्रांसप्लाट… अब ले चुका है विशाल आकार

इंदौर। शहर को जरा इस नजर से भी देखो श्रृंखला में इस बार उस विस्थापन की कहानी जहां जिंदगी निराश नहीं हुई बल्कि और भी मुस्कुराई है। विकास के नाम पर 16 वर्ष पहले पलासिया चौराहे से बरगद के विशाल वृक्ष को हटाया जाना था। उसे काटने के बजाय ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया और राऊ स्थित शैक्षणिक संस्थान में लगाया गया। आज वह वृक्ष वहां और भी ज्यादा विशाल आकार ले चुका है।

बीआरटीएस जिसे पहले एबी रोड कहा जाता था। यहां शहर के प्रमुख चौराहों में से एक पलासिया चौराहे पर 250 वर्ष पुराना बरगद का विशाल पेड़ था। इसी पेड़ की छाया में दर्जनभर से अधिक ठेले गुमटियों की छोटी चौपाटी भी संचालित होती थी। लोक परिवहन का हर एक साधन ही से उपलब्ध होता था।

सड़क विस्तार को लेकर इस विशाल पेड़ को काटने का निर्णय लिया गया। तैयारी भी पूरी हो गई। लेकिन इस बीच एक निजी कालेज सामने आया और पेड़ ट्रांसप्लांट करने का प्रस्ताव रखा। कई विशेषज्ञों की राय के बाद पेड़ ट्रांसप्लांट करने पर सहमति बनी। लेकिन यह इतना आसान काम नहीं था।

  • राजेंद्र नगर स्थित निजी कालेज के प्रबंधन ने बताया कि इस पेड़ को पलासिया से निजी कालेज तक करीब 11 किमी तक लाना था, जो कि आसान काम नहीं था, लेकिन सभी विभागों के सहयोग से काम शुरू किया गया।
  • विशेषज्ञों की मौजूदगी में रात 9.30 बजे जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से पेड़ को 40 फीट लंबे ट्राॅले पर लोड किया गया।
  • पेड़ के रूट पर केमिकल आदि लगाकर कवर किया गया। यह 11 किमी का सफर सुबह 5.30 बजे पूरा हुआ।
  • काॅलेज परिसर में ही पेड़ के लिए पहले से ही गड्ढा खोदकर केमिकल और पलासिया में जहां पेड़ लगा था, वहां की मिट्टी डाली गई थी। अलसुबह पेड़ को काॅलेज परिसर में ट्रांसप्लाट किया गया।

एक सितंबर 2008 को बरगद के पेड़ को काॅलेज परिसर में ट्रांसप्लाट किया गया था। तीन माह तक विशेषज्ञों की राय अनुसार पेड़ की देखरेख की गई। करीब तीन माह बाद पेड़ में नई कोपलें आने लगी। यह देख काॅलेज प्रशासन खुशी से झूम उठा। वर्तमान में यह पेड़ दोबारा अपने पुराने तेवर में आ गया है। पेड़ की छांह अब वाहन पार्क करने में आती है,ताे दोपहर में काॅलेज के बच्चे यहां आकर पढ़ते भी हैं।

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