: हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह के बारे में इजरायल को जानकारी किसने दी थी? इजरायल को ये कैसे पता चला कि नसरल्लाह कब और कहां होगा? जो नसरल्लाह करीब पिछले दो दशक में कभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया, उसके बारे में इतनी पुख्ता जानकारी इजरायल को कहां से मिली? तो इस बारे में जो खबर अब सामने आई है, उसके मुताबिक, नसरल्लाह की मुखबिरी किसी और ने नहीं बल्कि खुद ईरान के एक खुफिया एजेंट ने की थी.
पिछले 12 दिनों से रह-रह कर दहल रहे लेबनान के लिए ये सुबह भी कोई अलग नहीं थी. देश के मुख्तलिफ़ हिस्सों में आसमान से बमों की बारिश का सिलसिला लगातार जारी था. लेकिन इसी कड़ी में दोपहर डेढ़ बजे दक्षिणी बेरुत के देहिय इलाक़े में जो कुछ हुआ, वो इस सिलसिले का सबसे बड़ा और सबसे भयानक हमला था. अचानक आसमान में इज़रायली एफ-35 लड़ाकू विमानों के गरजने की आवाज़ सुनाई पड़ी, लेकिन इससे पहले कि लोगों को संभलने का मौक़ा मिलता, एक के बाद एक कई धमाकों से देहिय में मौजूद हिज़्बुल्ला का पूरा का पूरा किला-नुमा हेडक्वार्टर ही ज़मींदोज़ हो गया.
इन हमलों से धूल-धुएं और शोलों का ऐसा ग़ुबार उठा कि दूर से देखने वाले भी सहम गए, जो पास थे उनकी तो मानों जीते-जी रूह फनां हो गई. फिर इसके फौरन बाद सामने आई एक ऐसी ख़बर जिसने लेबनान से लेकर ईरान तक को या फिर यूं कहें कि पूरे मिडिल ईस्ट तक को हिला कर रख दिया. देहिय पर हुए इन हवाई हमलों में लेबनानी मिलिशिया ग्रुप हिज्बुल्लाह के मुखिया और इजरायल के दुश्मन नंबर वन हसन नसरल्लाह की मौत हो चुकी थी. जी हां, उसी हसन नसरल्लाह की, हिज्बुल्लाह की कमान पिछले तीस सालों से जिसके हाथों में थी और उसी नसरल्लाह की, जिसने हिज्बुल्लाह पर हुए पेजर अटैक के बाद इज़रायल से बदला लेने की धमकी दी थी. लेकिन इससे पहले कि हिज़्बुल्लाह इजरायल पर कोई बड़ा घात कर पाता, इज़रायल ने एक ही झटके में अपने सबसे बड़े दुश्मन को ढेर कर दिया.
लेकिन फिर सवाल उठता है कि वो नसरल्लाह जो पिछले तीस सालों से लगातार इज़रायल को खून के आंसू रुला रहा था और वो नसरल्लाह जिसकी पिछले 18 सालों में एक भी पब्लिक अपियरेंस नहीं थी, यानी जो एक बार भी सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने नहीं आया, आख़िर उसी नसरल्लाह के बारे में इज़रायल को इतनी सटीक और इतनी पुख्ता जानकारी कैसे मिली? आख़िर कैसे इज़रायल को ये पता चला कि शनिवार की दोपहर को ठीक डेढ़ बजे नसरल्लाह देहिय में मौजूद हिज़्बुल्लाह के हेडक्वार्टर में पहुंचेगा? और आख़िर कैसे इज़रायल ने इस ऑपरेशन को आनन-फानन में इतने परफेक्शन के साथ अंजाम दे दिया? तो इसका श्रेय जाता है इज़रायल की ख़ुफ़िया एजेंसियों और उसके इंटेलिजेंस नेटवर्क को.
पिछले 11 दिनों से इज़रायल की ओर से जारी हमले के चलते तकरीबन पूरे लेबनान में अजीब सी खामोशी थी. फिज़ा में तनाव के साथ घुले बारुद की गंध को महसूस किया जा सकता था. इसी गम गुस्से और खौफ के बीच महज़ एक रोज़ पहले यानी 27 सितंबर को हुए एक हमले में हिज़्बुल्लाह के ड्रोन यूनिट के चीफ मोहम्मद हसन सरूर की मौत हो गई थी और ये भी हिज्बुल्लाह के एक बड़ा झटका था. शहर के हरेत-हरिक इलाके में उसके कफन-दफ्न की रस्में निभाई जा रही थीं. लेकिन इसी बीच आगे की प्लानिंग के लिए नसरल्लाह ने हिज़्बुल्लाह के हेडक्वार्टर का रुख करने का फैसला किया.
फ्रेंच न्यूज़ पेपर ली पेरेसियन की मानें तो इस बार इस मूवमेंट की खबर हिज़्बुल्लाह में गहरी पैठ रखने वाले ईरानी खुफिया एजेंट को वक़्त से पहले लग गई. और ये खुफ़िया एजेंट बेशक ईरान का हो, लेकिन ये काम इजरायल के लिए कर रहा था. और बस, इसी एजेंट के इस एक इनफॉरमेशन में वो काम कर दिया, जिसकी कोशिश में इजरायल करीब तीन दशकों यानी तीस सालों से लगा हुआ था.
इज़रायली खुफिया एजेंसियों ने अपना काम कर दिया था. अब तक की सबसे अहम और सबसे खुफिया जानकारी इज़रायली डिफेंस फोर्स यानी आईडीएफ तक पहुंचा दी गई थी. अब कुछ बाकी था, तो वो था आनन-फानन में उस ऑपरेशन को प्लान करना, जिसके ज़रिए वो अपने दुश्मन नंबर वन हसन नसरल्लाह को ढेर कर पाता. तो जल्द ही वो काम भी हुआ. यूएन के दौरे पर गए इज़रायल के प्रधानमंत्री बेजांमिन नेतन्याहू को आनन-फानन में नसरल्लाह को लेकर आए इस नए इनपुट के बारे में इत्तिला दी गई. उधर, से हरी-झंडी मिली और इधर आईडीएफ ने एक नए ऑपरेशन की शुरुआत की, जिसे नाम दिया ऑपरेशन न्यू ऑर्डर.
आनन-फानन में इज़रायली एयरफोर्स के 69वीं स्क्वॉड्रन के एफ-35 और एफ-15आई जैसे ख़ौफ़नाक फाइटर जेट्स के बेड़े को तैयार किया गया. यानी वो लड़ाकू विमान जो बंकर बस्टर बम जैसे भारी-भरकम हथियारों के उड़ान भरने और सटीक मार करने की ताकत रखते हों. इधर, कमांडर का इशारा मिला और उधर देखते ही देखते दुश्मन की मौत का दूसरा नाम माने जाने वाले इन लड़ाकू विमानों ने हवा से बातें करने की शुरुआत कर दी. और फिर अगले चंद मिनटों के अंदर वो खबर सामने आई, जिसने हर किसी को चौंका दिया.
बेरूत में मौजूद हिज्बुल्लाह के ठिकाने पर ताबड़तोड़ बमबारी में हिज़्बुल्लाह का सबसे बड़ा नाम हसन नसरल्लाह मारा जा चुका था. खबरों के मुताबिक इजरायली फाइटर जेट्स ने अपने टार्गेट पर इस ऑपरेशन के दौरान हर दूसरे सेकंड पर बमबारी की और एक-एक कर कुल 13 हज़ार किलो वजन के बम मार कर पूरे इलाक़े को धुआं-धुआं कर दिया. इस हमले में सभी के सभी छह इमारतों को नामो-निशान मिट गया और इसमें नसरल्लाह की बेटी जैनब और उसके कई कमांडर समेत नसरल्लाह की भी मौत हो गई. इसके बाद पहले खुद इजरायली डिफेंस फोर्स यानी आईडीएफ ने पहले इस खबर का सोशल मीडिया पर ऐलान किया और फिर हिज्बुल्लाह ने भी नसरल्लाह को शहीद बताते हुए इस खबर की पुष्टि कर दी.
अब सवाल ये है कि आखिर वो बम कैसे थे, जिन्होंने एक ही झटके में हिज्बुल्लाह के किलेनुमा हेडक्वार्टर को ध्वस्त कर दिया. वो भी तब जब इस हेडक्वार्टर के नीचे हिज्बुल्लाह ने बेहद सुरक्षित माने जाने वाले बंकर बना कर रखे थे और मान कर चलते थे कि इन बंकरों को भेद पाना आसान नहीं है. तो जवाब है वो बम थे जीबीयू-72 और एमके-84 सीरीज़ के बम. इन बमों की खासियत कुछ ऐसी है जो ज़मीन के अंदर घुस कर धमाका करते हैं और बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं. खबरों के मुताबिक बेरुद में नसरल्लाह जिस इमारत में मौजूद था, उस पर जीबीयू-72 फैमिली के बम से हमला किया गया, जिसने पूरी की पूरी इमारत के साथ-साथ उसके नीचे मौजूद बंकर तक के परखच्चे उड़ा दिेए. स्टील और कंक्रीट की मोटी दीवारों को छेद कर इसने इतना बड़ा धमाका किया कि हमले वाली जगह कर करीब 30 फीट गहरा गड्ढा हो गया.
खबरों के मुताबिक इजरायल ने हिज्बुल्लाह के हेडक्वार्टर पर चंद मिनटों में करीब 80 से 85 बंकर बस्टर बम गिराए. बंकर बस्टर यानी जमीन की गहराई में बने अड्डों को खत्म करने वाले बम. ये जीबीयू-72 सीरीज के वो लेटेस्ट बम हैं, जिनका वजन 2268 किलोग्राम तक हो सकता है. असल में ये तहखाना, बंकर या सुरंगों को उड़ाने के लिए ही बनाए गए हैं. ये बम पहले जमीन में छेद करता है और फिर कुछ फीट अंदर जाकर विस्फोट करता है. अगर यह किसी इमारत पर गिरे तो उसकी नींव हिला देता है, जैसा कि इन तस्वीरों में भी दिख रहा है. ज़ाहिर है हिज्बुल्लाह के लड़ाके बेशक इजरायल को देख लेने की धमकी देते रहें, लेकिन इजरायल की फौजी ताकत और इंटेलिजेंस नेटवर्क के सामने ये लड़ाके कहीं भी नहीं टिकते.