निवेश के नाम पर सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा, व्यापारियों ने की 155 करोड़ की हेराफेरी

नागपुर: नागपुर के लकड़गंज थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपयों की हेराफेरी करने का मामला सामने आया है। शहर के ठग व्यापारियों ने मजदूरी के लिए नागपुर आए व्यक्ति के नाम पर फर्जी खाता खोल लिया। कमाई में उसे हिस्सा देने का आश्वासन दिया। बाद में उस व्यक्ति के नाम पर फर्जी कंपनी खोल ली गई और करोड़ों रुपयों की हेराफेरी होने लगी। जब पीड़ित व्यक्ति को लेन-देन का पता चला तो उसने विरोध किया। आरोपी व्यापारियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। आखिर पीड़ित व्यक्ति ने किसी तरह हिम्मत कर पुलिस से शिकायत की।

क्राइम ब्रांच द्वारा प्रकरण की जांच शुरू करने पर शिकायत सही होने का पता चला और लकड़गंज थाने में 8 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों में कबाड़ और लोहा चोरी को लेकर चर्चित बंटी शाहू, जयेश शाहू, अविनाश शाहू, ऋषि लाखानी, आनंद हरडे, राजेश शाहू, ब्रिजकिशोर मणिहार और अंशुल मिश्रा का समावेश है।

बंगाली पंजा निवासी बिस्वजीत सुधांशु रॉय (39) की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। बिस्वजीत मूलत: हुगली (बंगाल) के रहने वाले हैं। वहां वो फास्ट फूड की दुकान चलाते थे। 2023 में उनके पिता का देहांत हो गया। उनके इलाज के खर्च से बिस्वजीत की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। गांव में रहने वाला बिस्वजीत का दोस्त सूरज उर्फ प्रीतम केडिया नागपुर में काम कर रहा था। बिस्वजीत ने उससे बातचीत कर काम दिलाने को कहा।
बनाई गई फर्जी कंपनी

सूरज ने उन्हें नागपुर बुला लिया। जून 2024 में बिस्वजीत नागपुर आया। सूरज उन्हें ओल्ड भंडारा रोड पर स्मॉल फैक्ट्री एरिया के प्रीतम काम्प्लेक्स में ले गया। वहां उनकी मुलाकात बंटी, जयेश, अविनाश, ऋषि, आनंद, राजेश, ब्रिजकिशोर और अंशुल से करवाई। आरोपियों ने बिस्वजीत को बताया कि वो उसके नाम से मार्केट में पैसा लगाएंगे। जो फायदा होगा उसमें उसे प्रतिमाह हिस्सा दिया जाएगा।

बेरोजगार होने के कारण बिस्वजीत ने हां कर दी। आरोपियों ने बिस्वजीत से आधार कार्ड और पैन कार्ड लिया। कुछ कागजातों पर हस्ताक्षर लिए गए। वाठोड़ा परिसर में स्थित राजेश शाहू के गोदाम में उनके रहने का प्रबंध किया गया। 3 अगस्त 2024 को अविनाश ने बिस्वजीत के नाम पर एयरटेल कंपनी का सिम कार्ड लिया। ओटीपी की जरूरत पड़ेगी कहकर सिमकार्ड अपने पास रख लिया। साथ ही हिस्सा बोलकर उसे 25,000 रुपये भी दिए।

कुछ समय बाद बिस्वजीत को पता चला कि आरोपियों ने उसके नाम से क्षितिज इंटरप्राइजेस नामक कंपनी खोली है। इस कंपनी को स्मॉल स्केल इंडस्ट्री बताकर उद्योग मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन करवाया और जीएसटी नंबर भी हासिल कर लिया। बाद में कंपनी के नाम पर येस बैंक और द नागपुर स्मार्ट सिटी को-ऑपरेटिव सोसाइटी में 2 खाते खोले गए।

कंपनी के नाम पर अलग-अलग फर्म और दुकानदारों को माल बेचने के फर्जी बिल बनाए जाते थे। असल में कोई माल बेचा नहीं जाता था। बिल की राशि खाते में जमा होने के बाद व्यापारियों को खाते से रुपये निकालकर नकद लौटाए जाते थे। 9 सितंबर से 30 दिसंबर 2024 के बीच आरोपियों ने बिस्वजीत के नाम पर खोली गई क्षितिज इंटरप्राइजेस से 96 करोड़ 39 लाख रुपये का व्यवहार किया।

आरोपियों ने इसी तरह व्याहडपेठ, अमरावती रोड निवासी मिथुन राजू राजपांडे के नाम पर अवध इंटरप्राइजेस नामक फर्म खोली। इस फर्म के जरिए फर्जी ट्रेडिंग करके 59 करोड़ 51 लाख रुपये का व्यवहार किया गया। बिस्वजीत को जानकारी मिली कि रकम की हेराफेरी ऑनलाइन गैंबलिंग गेम और हवाला के लिए की जाती है।

जब बिस्वजीत को इस बारे में पता चला तो उसने अपने नाम पर सारे व्यवहार बंद करने को कहा लेकिन आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप रहने को कहा। बताया जाता है कि इसी तरह आरोपियों ने करीब 60 से 70 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन करवाया है। केवल 2 कंपनी से 155 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। अन्य कंपनियों की जांच करने पर यह धोखाधड़ी 1000 करोड़ से ज्यादा की हो सकती है। कोई मदद नहीं मिलने पर बिस्वजीत ने प्रकरण की शिकायत क्राइम ब्रांच से की।

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